इमोशनल हुईं प्रियंका चोपड़ा, दिल दहला देने वाला Video किया शेयर
नैरोबी। बॉलीवुड व हॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा जोनस हमेशा ग्लोबल मुद्दे पर अपनी राय रखती रहीं हैं और साथ ही आवाज भी उठाती रही हैं। प्रियंका ने ऐसे ही एक बार फिर से एक ऐसे ही क्राइसेस प्वाइंट पर सबका ध्यान खींचने की लिए आगे आईं है। प्रियंका चोपड़ा पिछले कुछ वर्षों से NUICEF यानी …
नैरोबी। बॉलीवुड व हॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा जोनस हमेशा ग्लोबल मुद्दे पर अपनी राय रखती रहीं हैं और साथ ही आवाज भी उठाती रही हैं। प्रियंका ने ऐसे ही एक बार फिर से एक ऐसे ही क्राइसेस प्वाइंट पर सबका ध्यान खींचने की लिए आगे आईं है। प्रियंका चोपड़ा पिछले कुछ वर्षों से NUICEF यानी संयुक्त राष्ट्र बाल कोष से भी जुड़ी हुई हैं, और वह हर साल संगठन के लिए कई देशों में काम करने जाती हैं। अब की केन्या से उन्होंने एक बेहद इमोशन व दिल दहला देने वाला वीडियों इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।
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सूखे की क्राइसेस देख असहज हुईं प्रियंका
विडियो के शुरूआत में प्रियंका कार मैं बैठी दिख रही हैं और वह मोबाइल पर खुद को रिकॉर्ड करते हुए सबसे पहले कहती हैं वह आज बहुत असहज महसूस कर रही हैं। आगे कहती हैं जब से मैंने केन्या के लिए फ्लाइट ली है तब से मन बेचैन हूं। प्रियंका कहती हैं वह यूनिसेफ के साथ केन्या में हैं।
भूखमरी के कागार पर बच्चे
प्रियंका इस समय केन्या में पड़ रहे सूखू के क्राइसेस को देखने यहां आई हैं। एक मां होने के नाते यह बेहद मुश्किल है फिर वह इस जर्नी पर अपने साथ सभी को ले जाना चाहती हूं। इसके बाद वह केन्या में जलवायु संकट के कारण बच्चों की स्थिति के बारे में बताती हैं और दृश्य से कन्या की स्थित से रूबरू कराती हैं। जो कि आप भी नीचे दिए गए इंस्टा लिंक पर देख सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन बड़ा कारण
प्रियंका चोपड़ा के मुताबिक केन्या में यह पहली बार नहीं है जब यहां सूखा पड़ा है। ये अलग बात है कि इस प्रकार का सूखा दशकों बार देखने को मिला। एक्ट्रेस ने इसका क्लाइमेट चेंज को बताया है। उन्होंने वीडियो में दिखाया बच्चे भूखे मर रहे हैं और लाखों लोग भुखमरी के कगार पर हैं। यह जलवायु संकट का चेहरा है, और यहाँ केन्या में यह अभी हो रहा है।
संकट समाधान की उम्मीद भी
हालांकि ये अच्छा रहा कि क्राइसेस के बाद भी एक्ट्रेस ने उम्मीद की एक अलख जगाई। उन्होंने कहा कि ये जलवायु संकट है लेकिन उम्मीद और समाधान भी है। अगले कुछ दिनों में मैं जान बचाने के लिए जमीन पर हो रहे यूनिसेफ के अपार प्रयासों को दिखाऊंगी। लेकिन इस अभूतपूर्व संकट को दूर करने के लिए, अच्छा काम जारी रखने के लिए पैसे की सख्त जरूरत है।
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