कोयला गैसीकरण, पौधरोपण से जलवायु परिवर्तन की दिशा में प्रयासः प्रल्हाद जोशी 

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Edited By Amrit Vichar
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कोयला गैसीकरण का सघन अभियान शुरू भी कर दिया है। जोशी ने एक मीडिया एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए भारत ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सघन कोयला गैसीकरण अभियान चलाने के साथ ही बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी शुरू किया है।

नई दिल्ली। कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन से संबंधित अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने कोयला गैसीकरण का सघन अभियान शुरू भी कर दिया है। जोशी ने एक मीडिया एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए भारत ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सघन कोयला गैसीकरण अभियान चलाने के साथ ही बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी शुरू किया है। 

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जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के बारे में दुनिया से जो प्रतिबद्धता जताई है, उसका निश्चित रूप से पालन किया जाएगा। उसके लिए हम गैसीकरण की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं ताकि प्रदूषण को तुलनात्मक रूप से कम किया जा सके। इसके साथ ही हमने व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान भी चलाया है। कोयले को हवा, ऑक्सीजन, भाप या कार्बन डाई ऑक्साइड के साथ आंशिक रूप से ऑक्सीकृत करने की प्रक्रिया कोयला गैसीकरण कही जाती है। 

मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीकरण से संबंधित प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाने के लिए कोयला मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की सभी इकाइयों (पीएसयू) से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि कई पीएसयू के साथ समझौता ज्ञापन किए गए हैं और मंत्रालय इसमें निजी क्षेत्र को भी शामिल कर रहा है। जोशी ने कहा कि सरकार गैसीकरण के लिए लिए व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण के लिए 6,000 करोड़ रुपये दे रही है। 

भारत एक दिसंबर से जी20 समूह का अध्यक्ष बनने जा रहा है। जी20 ने भी जलवायु परिवर्तन को अपने एजेंडे में काफी ऊपर रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के शुद्ध-शून्य उत्सर्जन स्तर हासिल करने का मतलब यह नहीं होगा कि भारत कोई उत्सर्जन ही नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इसका मतलब सिर्फ यह होगा कि भारत उत्सर्जन को आत्मसात करने की क्षमता हासिल कर लेगा। वैसे भी पश्चिमी देशों की तुलना में भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन एक-तिहाई भी नहीं है।

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