रामनगर: पहले बाघ, फिर बाघिन, कई विरोधाभास
रामनगर, अमृत विचार। कॉर्बेट के कालागढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित मर्चुला बाजार में घुसी एक बाघिन को गोली मारने के मामले की तस्वीर पूरी जांच के बाद ही साफ होगी।
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम में कई विरोधाभास सामने आ रहे हैं। पहले इसे बाघ बताया गया, फिर वन विभाग की टीम पहुंचने पर इसे बाघिन बताया गया। बाघिन को गोली मारने वाला कौन शख्स था, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
हालांकि कालागढ़ टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा का प्रारंभिक तौर पर कहना है कि मर्चुला बाजार में घुस आए बाघ को ग्रामीणों एवं वनकर्मियों ने भगाने का प्रयास किया लेकिन उसने हमला करने का प्रयास किया। इस बीच एक वन कर्मी द्वारा फायर किया गया जो संभवतः उसे लग गया होगा। बाद में यह बाघ एक आवास की गैलरी में घुस गया, जहां वह मृत पाया गया।
जांच के बाद यह बाघ नहीं, बाघिन निकली। उधर, प्रमुख वनसंरक्षक वन्यजीव उत्तराखंड समीर सिन्हा का कहना है कि पूरा प्रकरण अभी सामने नहीं आया है। कॉर्बेट के अधिकारियों को सभी तथ्यों का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
