स्वीडन, आस्ट्रिया, जर्मनी, स्पेन और एस्टोनिया के राजनयिक पहुंचे रामपुर
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के निमंत्रण पर नूर महल पहुंचे राजनयिक, राजनयिकों ने रजा लाइब्रेरी में रखी पांडुलिपियों और किताबी खजाने को देखा
रजा लाइब्रेरी की इमारत के सामने तस्वीरें खिंचवाते विदेशी मेहमान।
रामपुर, अमृत विचार। भारत में स्वीडन के दूतावास प्रमुख क्रिस्टीयान कामिल, ऑस्ट्रिया की दूतावास प्रमुख गीजला क्रिस्टोफेरिच, जर्मनी के दूतावास प्रमुख कासपर मायर, स्पेन की दूतावास प्रमुख एलेना पेरेज और एस्टोनिया के दूतावास प्रमुख मार्गस सॉल्सन शनिवार को रामपुर पहुंचे। विदेशी मेहमानों का नूरमहल में जोरदार स्वागत हुआ। इसके बाद राजनयिकों ने रजा लाइब्रेरी में रखी पांडुलिपियों और किताबे खजाने को देखा और रजा लाइब्रेरी की इमारत के आगे तस्वीरें खिंचवाईं।
राजनयिकों का नूर महल में पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के अलावा पूर्व सांसद बेगम नूरबानो और बेगम यासीन अली खान उर्फ शाहबानो ने फूल मालाएं पहनाकर परंपरागत रूप से स्वागत किया। उन्हें शाही दस्तरख्वान के व्यंजन बहुत पसंद आए। रजा लाइब्रेरी में राजनयिकों ने सातवीं सदी में हजरत अली के हाथ का लिखा कुरआन मजीद, भोजपत्र पर लिखी रामायण, पांडुलिपियां और पेंटिंग्स देखीं। हामिद मंजिल और रंग महल की भव्यता ने उन्हें बहुत प्रभावित किया।
विजीटर्स बुक में अपना संदेश लिखते हुए राजनयिकों ने रजा लाइब्रेरी की जबरस्त प्रशंसा की। स्वीडन के दूतावास प्रमुख क्रिस्टीयान कामिल ने लिखा कि इस लाइब्रेरी में आना बहुत अद्भुत अनुभव रहा। यहां का संग्रह दुनियाभर के शोधकर्ताओं के लिया ज्ञान का भंडार है। पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि शनिवार को जो राजनयिक नूर महल पहुंचे, उनमें भारत में स्वीडन के दूतावास प्रमुख क्रिस्टीयान कामिल, ऑस्ट्रिया की दूतावास प्रमुख गीजला क्रिस्टोफेरिच, जर्मनी के दूतावास प्रमुख कासपर मायर, स्पेन की दूतावास प्रमुख एलेना पेरेज और एस्टोनिया के दूतावास प्रमुख मार्गस सॉल्सन शामिल थे। विदेशी महमानों ने रामपुर में हुए स्वागत के लिए खुशी जाहिर की।
स्पेन और ऑस्ट्रिया की राजनयिकों ने पहनी चूड़ियां
स्पेन की दूतावास प्रमुख एलेना पेरेज और ऑस्ट्रिया की दूतावास प्रमुख गीजला क्रिस्टोफेरिच ने नूर महल में चूड़ियां पहनकर भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का संदेश दिया। पूर्व मंत्री नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि महिला राजनयिकों और दो राजनयिकों की पत्नियों को चूड़ियां पहनाई गईं। इसके लिए चूड़ी वालों को नूर महल बुलाया गया था। दोनों राजनयिकों को कांच, ब्रास और सीप की चूड़ियां पसंद आईं। नवेद मियां ने उन्हें भारतीय नारी के लिए चूड़ी के महत्व के बारे में बताया।
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