हल्द्वानी: जंगलात करेगा बंदरों का बधियाकरण, प्रत्येक वन डिवीजन को पांच सौ बंदरों के बधियाकरण का लक्ष्य
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहर व जंगल से सटी बस्तियों में जल्द ही बंदरों के आतंक से निजात मिलेगी। जंगलात ने बंदरों का बधियाकरण करने जा रहा है। प्रत्येक वन डिवीजन को पांच सौ बंदरों के बधियाकरण का लक्ष्य दिया गया है।
पहाड़ हो या मैदान बंदरों के आतंक से हर कोई परेशान है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेती की बर्बादी में एक वजह बंदर भी माने जाते हैं। अब वन विभाग ने बंदरों के आतंक से निजात दिलाने का बीड़ा उठाया है। वन विभाग ने बंदरों के बधियाकरण करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक वन डिवीजन को बंदरों को बधिया करने का लक्ष्य दिया गया है।
पश्चिमी वन वृत्त की पांचों वन डिवीजन तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी हल्द्वनी, रामनगर में 500-500 बंदरों के बधिया करने का लक्ष्य दिया है। वन विभाग को इंसानी बस्तियों से सटे जंगल या आसपास के जंगलों से बंदरों को पकड़ना होगा। इन बंदरों को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाया जाएगा।
जहां पशु चिकित्सक बंदरों का बधियाकरण करेंगे। फिर वापस उन्हें उसी जंगल में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें लाया गया था। इधर, डीएफओ हल्द्वानी बाबूलाल ने एसडीओ ममता चंद व छकाता रेंजर बीएस मेहता के साथ बैठक की और बधियाकरण को लेकर जरूरी निर्देश दिए।
राज्य में हैं 1,10,481 बंदर व 37,735 लंगूर
वन विभाग के मुताबिक वर्ष 2021 में हुई गणना के मुताबिक राज्य में 1,10,481 बंदर व 37,735 लंगूर हैं। वर्ष 2015 में 1,46,432 बंदर और लंगूरों की संख्या 54,804 थी। वन विभाग का दावा था कि 42761 बंदरों का बधियाकरण होने की वजह से बंदरों व लंगूरों की संख्या में कमी आई थी।
बंदरों के बधियाकरण को लेकर निर्देश दिए हैं। वन टीम बंदरों को जंगलों से लेकर रानीबाग रेस्क्यू सेंटर लाएगी। जहां उनका बधियाकरण होने के बाद वापस उन्हें उसी जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि उनका वास स्थल प्रभावित नहीं हो।
- दीप चंद्र आर्य, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त हल्द्वानी
