नैनीताल: काहिल व्यवस्था ने रस्सी लगाकर खुला छोड़ दिया 'मौत का दरवाजा'
नैनीताल, अमृत विचार। लोअर मिड मालरोड में चार माह पूर्व दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुई रैलिगं राहगीरों व वाहन चालकों के लिए मौत का दरवाजा बना हुआ है। चार माह बीत जाने के बाद भी संबधित विभाग ने प्रभावित स्थल पर महज एक रस्सी लगा कर अपने कार्य की इतिश्री कर ली। काहिल व्यवस्था ने अब तक मौत का दरवाजा खुला छोड़ रखा है।
इस स्थान पर यदि राहगीरों व वाहन चालकों से थोड़ी भी गलती हुई तो वह सीधे नैनी झील में समा सकते हैं। हालत यह है कि ऐसे डैंजर इलाकों में बचाव के लिए निशान अथवा अस्थाई पैरापिटों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन लगभग 10 मीटर क्षतिग्रस्त क्षेत्र को दुर्घटना के लिए खुला छोड़ दिया है।
इस स्थान पर झील की सुरक्षा दीवार भी क्षमिग्रस्त हुई है। सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार रैलिंग व सुरक्षा दीवार की मरम्मत को आपदा मद में डीपीआर बना कर प्रशासन को भेज दी गई है। बजट मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जायेगा। गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई माह में एक तेज गति वाहन ने मिड लोअर मालरोड के लाईब्रेरी से आगे 100 मीटर की दूरी पर लगभग 10 मीटर की रैलिंग, उससे लगी झील की सुरक्षा दीवार व एक लैम्पपोस्ट को क्षतिग्रस्त कर दिया था।
सिंचाई विभाग ने इस स्थान पर महज रस्सी लगा कर छोड़ दिया है। अब यह स्थान डैंजर जोन बना हुआ है। इस स्थान पर अस्थाई पैरापिट व रोशनी के अभाव के चलते खतरे का सबब बना हुआ है। आश्चर्यजनक तो यह है कि इस मार्ग से सूबे के सीएम पुष्कर सिंह धामी दो बार गुजर चुके हैं। डीएम, कमिश्नर सहित हाई कोर्ट के अधिकारी व संबंधित अधिकारी हर रोज गुजरते हैं, लेकिन काहिल व्यवस्था को किसी की परवाह नहीं है। इस स्थान पर कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। नगरपालिका ने भी इस स्थान पर अब तक रोशनी की भी कोई व्यवस्था नहीं की है। शायद इन विभागों को कोई बड़ी दुर्घटना का इंतजार है।
मिड लोअर मालरोड पर लगभग 10 मीटर की रैलिंग, उससे लगी झील की सुरक्षा दीवार व एक लैम्पपोस्ट क्षतिग्रस्त है। सुरक्षा की दृष्टि से इस स्थान पर दो रस्सी लगाई गई हैं। रैलिंग व सुरक्षा दीवार की मरम्मत को आपदा मद में डीपीआर बना कर प्रशासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जायेगा।
-दीन दयाल सती, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग नैनीताल।
