हल्द्वानी: पहाड़ की प्रसूताओं के लिए मिलेंगी 262 नई डोली पालकियां

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों की प्रसूताओं को गांव से सड़क तक लाने के लिए 262 नई डोली पालकियां मिलेंगी। इसके लिए उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने भारत सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार गर्भवती महिलाओं और मातृ-शिशु के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के हरसंभव प्रयास कर रही है। इसी प्रयास में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के सहयोग से सभी जनपदों को अगले कुछ वर्षों में 262 नई डोली पालकियां प्रदान की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग शगुन योजना को बढ़ावा दे रहा है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 48 घंटे तक रहने के बाद 2000 रुपये दिये जाने के प्रावधान किए गए हैं। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि हरिद्वार में मातृ-शिशु की देखभाल के लिए 200 बेड का स्वास्थ्य विंग बनाया जा रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही इसका निर्माण शुरू हो जाएगा।
 
बदली जायेंगी पुरानी एम्बुलेंस
स्वास्थ्य सचिव ने मातृ-शिशु चिकित्सा सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में पुरानी और खराब एंबुलेंसों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाएगा। जिसका लाभ मरीजों मिलेगा। 

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की होगी मॉनिटरिंग
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं को आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां उपलब्ध करा रहा है। प्रत्येक मातृ और नवजात मृत्यु की समीक्षा और रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक उपाय चल रहे हैं। साथ ही एनएचएम के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए हीमोग्लोबिन मीटर और स्ट्रिप्स के आदेश जारी किए गए हैं।

आशा व आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के लिए होंगे एक मानक
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं पर नजर रखने के लिए आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जा रही है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की निगरानी पर ध्यान देने के साथ वन स्टॉप सेंटर के उपयोग करने के निर्देश दिये हैं। उम्मीद है कि ये पहल उत्तराखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

डोली पालकी दूरस्थ गांव से प्रसूता को सड़क तक लाने के लिए है। एनएचएम के तहत भारत सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। प्रस्ताव मंजू होते ही हर जिले की ग्रामसभा को फंड दिया जाएगा, जो आवश्यकता अनुसार पालकी बनाएंगी।
- डॉ. आर राजेश कुमार, स्वास्थ्य सचिव उत्तराखंड

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