हल्द्वानी: ढाई करोड़ फूंके फिर भी 13 वेंटिलेटरों में लगा ताला
हल्द्वानी, अमृत विचार। बेस अस्पताल में आईसीयू और पीआईसीयू संचालित करने का सपना अभी भी सपना ही है। आईसीयू और पीआईसीयू के उद्घाटन को तीन साल हो गए, लेकिन स्टाफ न होने की वजह से इसमें ताला लगा पड़ा है। करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद आईसीयू और पीआईसीयू में रखे वेंटिलेटरों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
कोरोना की पहली लहर के दौरान वर्ष 2020 में बेस अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए आईसीयू बनाया गया था। जिला खनिज न्यास निधि से रुपयों का इंतजाम किया गया। करीब दो करोड़ की लागत से आईसीयू बनकर तैयार हुआ। इसमें नौ बेड रखे गए। साथ ही बच्चों के उपचार के लिए चार बेड का पीआईसीयू भी बनाया गया।
इसमें करीब 70 लाख रुपये खर्च हुए। ढाई करोड़ की लागत से आइसीयू और पीआईसीयू को तैयार किया गया। उम्मीद थी कि अब गंभीर मरीजों का उपचार बेस अस्पताल में हो पाएगा और सुशीला तिवारी अस्पताल पर बोझ कम होगा। लेकिन स्टाफ न होने के कारण उम्मीद पर पानी फिर गया। जिस कारण वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। सरकार ने जल्दबाजी में आईसीयू और पीआईसीयू तो बना दिए, लेकिन इनको चलाने के लिए अब तक जरूरी स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो पाई।
13 वेंटीलेटरों को चलाने के लिए ये जरूरी स्टाफ चाहिए
1-4 क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉक्टर
2-दो एनेस्थिसियोलॉजिस्ट
3-42 नर्सेज
4-6 वार्ड बॉय
तीन डीएम और पीएमएस आ गए, लेकिन स्थिति वही
बेस अस्पताल में आईसीयू स्थापित होने के बाद तीन पीएमएस आ गए हैं। पूर्व पीएमएस डॉ. हरीश लाल के समय आईसीयू बनाया गया था। उसके बाद पीएमएस पद की जिम्मेदारी डॉ. सविता हयांकी ने संभाली। अब डॉ. केके गुप्ता पीएमएस का पद संभाल रहे हैं। हर पीएमएस ने अपने कार्यकाल में स्टाफ के लिए शासन को पत्र लिखा है, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इसी तरह डीएम सविन बंसल के कार्यकाल में आईसीयू और पीआईसीयू का निर्माण हुआ था। उनके बाद धीराज गर्ब्याल डीएम रहे अब वंदना डीएम हैं।
