बदायूं: मां के नहीं सूख रहे आंसू, दर्द भी बयां नहीं कर पा रहा बेबस पिता

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मृतकों के पिता विनोद कुमार ने रोके आंसू, कहा किसी को तो मजबूत होना पड़ेगा

ऋषिदेव गंगवार/बदायूं,अमृत विचार। खुशहाल परिवार में बच्चों की चहक, खुशनुमा माहौल। चंद मिनटों में ही सबकुछ उजड़ जाना। एक मां के सामने उसके दो बच्चों की निर्दयतापूर्वक हत्या। कैसा रहा होगा वो मंजर। सोचकर भी दिल सिहर उठेगा। 19 मार्च को बाबा कॉलोनी नई बस्ती की घटना दिल को कचोटने वाली है। तीसरे दिन भी एक मां की आंखों के आंसू नहीं सूख रहे हैं। पिता दिल में दर्द दबाए है। जो अपने इकलौते बेटे और पत्नी की वजह से आंखों में आंसू नहीं ला रहा। पीड़ा होती है तो एकांत में जाकर रो लेता है और फिर अपने परिवार के पास आ जाता है। उनका कहना है कि अब इकलौता बेटा और पत्नी ही बचे हैं। अगर उनके सामने रोएंगे तो उनको कौन संभालेगा।

पड़ोस में दुकान चलाने वाले दो भाई साजिद और जावेद पर तीन बच्चे आयुष, आहान उर्फ हन्नू और पीयूष की मां संगीता गलत भरोसा कर बैठी। वह साजिद द्वारा बताई गई अपनी पत्नी के गर्भवती होने और जिला महिला अस्पताल में भर्ती होने की बात को सही मान गईं। उन्होंने एक गर्भवती के दर्द को समझा और साजिद को रुपये दे दिए। उन्हें क्या पता था कि जिसे वह रुपये दे रही हैं वह जल्लाद है। उनके घर के चिराग को छीन लेगा।

वह चाय बनाने लगीं और साजिद ने उनके दो बेटों की छत पर हत्या कर दी। चंद मिनटों में ही मंजर अलग था। दुनिया उजड़ चुकी थी। मां को बेटों की हत्या करने का कारण तक पता नहीं है। मासूमों के पिता विनोद कुमार के रो-रोककर आंसू सूख चुके हैं। वह अपनी इकलौते बचे बेटे पीयूष और पत्नी संगीता को दर्द दिखा भी नहीं सकते। मन में दर्द लिए बस अपने बेटे और पत्नी की ओर निहारते रहते हैं। बेबस पिता उनके सामने अपना दर्द बयां भी नहीं कर पा रहा है। उनका कहना है कि किसी को तो मजबूती दिखानी होगी।

उठती हैं, पानी पीती हैं और फिर बेसुध हो जाती है मां
हत्याकांड के बाद से मासूमों की मां एक कमरे के हाल में ही लेटी रहती हैं। भरोसा नहीं हो रहा है कि उनके दो चिराग अब इस दुनिया में नहीं हैं। हत्या के तीसरे दिन तक वह बेसुध पड़ी रहती हैं। कभी उठती हैं, लोग उन्हें पानी पिलाते हैं। वह मोबाइल में अपने बेटों के फोटो देखती हैं और वह फिर बेसुध होकर ले जाती हैं।

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