Exclusive: दिल्ली की चार सीटों पर गुल खिला सकता मुस्लिम मतदाता; आप और कांग्रेस का गठबंधन होने से वोटों का बिखराव होना मुश्किल

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Edited By Amrit Vichar
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उत्तर पूर्व, पूर्वी दिल्ली, चांदनी चौक और नई दिल्ली लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता 14 से 21 फीसदी तक

चुनाव डेस्क, राजपुरुष। दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर 25 मई को वोट डाले जाएंगे। पिछले दो चुनाव से भाजपा यहां की सभी सात सीटों पर कमल खिला रही है। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी बदली हुई है। इंडिया गठबंधन के तहत आम आदमी पार्टी चार और कांग्रेस तीन सीटों पर भाजपा का मुकाबला कर रही है। ऐसे में बड़ा सवाल मुस्लिम मतदाताओं का रुख है। 

2019 के लोकसभा चुनाव में मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच त्रिकोणीय था। इससे मुस्लिम वोट बिखर गया था। अबकी बार कांग्रेस-आप के गठबंधन का भाजपा से सीधा मुकाबला है। ऐसे में मुस्लिम मतों के बिखराव की संभावना नहीं है। दिल्ली में चार लोकसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं के एकमुश्त वोट भाजपा की चिंता बढ़ा रहे हैं। 

हालांकि भाजपा नेता कह रहे हैं कि मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ सभी धर्मों के गरीब वर्ग को मिल रहा है। पसमांदा मुस्लिमों को सबसे ज्यादा फायदा मिला है। इससे भाजपा के विरुद्ध मुस्लिमों को लेकर किया जाने वाला दुष्प्रचार अब उतना प्रभावी नहीं रहा है। मुस्लिम समाज इस बात से सहमत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए काम कर रहे हैं। इसका लाभ भाजपा को चुनाव में अवश्य मिलेगा।

दिल्ली में भाजपा के खिलाफ एकमुश्त मुस्लिम वोट पाने की उम्मीद लगाए बैठा इंडिया गठबंधन की ओर से आप और कांग्रेस दोनों ने कोई मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। बहुजन समाज पार्टी ने जरूर  चांदनी चौक सीट से एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी अब्दुल कलाम आजाद को मैदान में उतार रखा है। 

दिल्ली में तीन लोकसभा सीटों पर उत्तर पूर्व दिल्ली,  पूर्वी दिल्ली और चांदनी चौक में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को अहम माना जाता है। उत्तर पूर्व दिल्ली लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा करीब 21 फीसदी, पूर्वी दिल्ली में में लगभग 17 फीसदी और चांदनी चौक सीट पर 14 फीसदी  मुस्लिम मतदाता हैं। 

2014 के लोकसभा और 2015 के विधानसभा चुनाव से मुस्लिम समुदाय को वोट कांग्रेस से आम आदमी पार्टी की तरफ खिसक गया था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता ने एक बार फिर कांग्रेस का रुख किया, इसका नतीजा रहा कि कांग्रेस दिल्ली में भले ही लोकसभा की एक भी सीट नहीं जीत पाई, लेकिन वोट फीसदी में उसने आम आदमी पार्टी को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल कर लिया था। 

उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे अधिक 21 फीसदी है, इंडिया गठबंधन में कांग्रेस से इस सीट पर कन्हैया कुमार चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के सांसद मनोज तिवारी से हैं। इस सीट पर पूर्वांचल के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। पूर्वी दिल्ली में 16.8 फीसदी मुस्सिम मतदाता माने जाते हैं।  

इस लोकसभा सीट से इंडिया गठबंधन की तरफ से आम आदमी पार्टी  ने कुलदीप कुमार को मैदान में उतारा है। भाजपा ने यहां प्रत्याशी बदलकर हर्ष मल्होत्रा को उम्मीदवार बनाया है। चांदनी चौक में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 14 फीसदी है।  

इस लोकसभा क्षेत्र में आदर्श नगर, शालीमार बाग, शकूरबस्ती, वजीरपुर,  सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल और  बल्लीमारान जैसी विधानसभा सीटें आती हैं, जिन पर मुस्लिम मत निर्णायक माने जाते हैं। चांदनी चौक से इस बार कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल और भाजपा के प्रवीण खंडेलवाल के बीच मुकाबला है।

नई दिल्ली लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता चांदनी चौक जितने 14 फीसदी गिने जाते हैं। इस लोकसभा सीट पर इस बार आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सोमनाथ भारती और बाजपा की बांसुरी स्वराज के बीच चुनावी संघर्ष हो रहा है। 

उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता 10.6 फीसदी गिने जाते हैं, यहां कांग्रेस के उदित राज का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी योगेंद्र चंदोलिया से हो रहा है। इसी तरह दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में सात फीसदी मुस्लिम मतदाताओं का अनुमान लगाया जाता है। इस लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सहीराम पहलवान और भारतीय जनता पार्टी के रामवीर सिंह बिधूड़ी के बीच है।

पश्चिमी दिल्ली में 6.8 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। इस सीट पर इस बार भाजपा ने दक्षिणी दिल्ली के पूर्व मेयर कमलजीत सहरावत को मौका दिया है। पिछली बार 2019 में यहां से भाजपा के प्रवेश वर्मा जीते थे।  आम आदमी पार्टी की तरफ से महाबल मिश्रा भाजपा का मुकाबला कर रहे हैं। 

बुनियादी सुविधाओं का अभाव, सीएए की चर्चा व दंगे की याद

दिल्ली के अधिकतर मुस्लिम इलाकों में घनी आबादी है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बिजली सप्लाई में सुधार,  सड़क, पानी और अतिक्रमण जैसे मुद्दे अहम हैं।  इसके अलावा चुनाव से पहले लागु हुआ सीएए  जैसा मुद्दा भी है, जिसकी मुस्लिम इलाकों में चर्चा है। इसके साथ ही दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए दंगे की याद भी लोग दिलाते हैं। 

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