ऑरेंज आर्मी 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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पिछले हफ्ते जब भारी बारिश के कारण लगभग हर नदी अपने उफान पर थी। आसमान से बरसती मूसलधार बूंदें और धरती पर बहता पानी, हर तरफ एक अजीब-सा सन्नाटा और खौफ पैदा कर रहा था। इन हालातों में रात की ड्यूटी करना हमेशा से सबसे मुश्किल होता है। उन्हीं दिनों एक रात मेरी ड्यूटी बरेली सिटी-पीलीभीत पैसेंजर में थी। देवहा नदी का पुल रास्ते में पड़ता है। नदी उफान पर थी, लहरें मानो चेतावनी दे रही हों कि नदी से दूर रहने में भी भलाई है।

इंजन के शीशे पर जब बारिश की बूंदें 110 किमी की रफ्तार से टकराती हैं तो सामने का नजारा एकदम धुंधला हो जाता है। ऊपर से रात का अंधेरा हो तो रास्ता और भी डरावना लगता है। ऐसे में दिल बार-बार यही सोचता है, कहीं ट्रैक धंस न गया हो, कहीं पुल की मिट्टी बह न गई हो। हर क्षण एक अनदेखा डर साथ चलता रहता है। जब भी पुल पर या ट्रैक के किनारे नारंगी ड्रेस पहने ट्रैक मैन की एक परछाई नजर आती है, तो दिल को एक अलग सा सुकून मिल जाता है। 

वो धुंधली सी तस्वीर बताती है कि ‘आगे सब सही है।’ यही वो इंसान होते हैं, जो आधी रात, तूफान, ठंडी, गर्मी या बारिश हर मौसम में हमारी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए डटे रहते हैं। वहीं नाइट पेट्रोलिंग करते गैंगमैन, ट्रैकमैन और कीमैन, जो खुद हमारे सफर में हमारे साथ नहीं बैठते, लेकिन हमें मंजिल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए हर पल साथ खड़े रहते हैं। ट्रेन जब भी उनके पास से गुजरती है, हम लंबा हॉर्न देते हैं ताकि वो सतर्क हो जाएं। बदले में वो हमें बिना जाने-पहचाने, बस इंसानियत और अपने फर्ज के नाते, एक हाथ उठाकर अभिवादन करते हैं। 

ये रिश्ता बड़ा अजीब है, न नाम जानते हैं, न कभी ठीक से मिले हैं। सालों से यही रिश्ता चलता आ रहा है। शायद कभी मंजिल पर जाकर उनसे मुलाकात हो जाए, शायद कभी न हो, लेकिन सफर के रास्ते हमेशा हमारे और उनके सांझा रहते हैं। सच कहूं तो… जब भी रात के अंधेरे में नारंगी ड्रेस वाली वो परछाई दिखती है, तो लगता है कि चलो आगे का रास्ता सही है। कभी-कभी सोचता हूं, हम लोको पायलट तो सबके सामने रहते हैं, लोग हमें पहचानते हैं। 

मगर ऑरेंज आर्मी वाले साए का कोई नाम नहीं, कोई पहचान नहीं। वो चुपचाप अपने हिस्से का फर्ज निभाकर अगली रात फिर उसी रास्ते पर खड़े मिल जाते हैं। जिंदगी में न जाने कितनी मंजिलें बदलती रहती हैं, कितने सफर पूरे होते रहते हैं, लेकिन उनके साथ जुड़ा ये मौन रिश्ता कभी नहीं बदलता। वो हमारे सफर के अनकहे, अनजाने साथी हैं, जिन्हें हम कभी धन्यवाद तक नहीं कह पाते। शायद यही उनकी सबसे बड़ी महानता है।-रवि