Movie Reviews: 'द ट्रायल' और 'हृदयपूर्वम' फिल्म ने रिलीज के साथ मचाई धूम, देखिए आखिर मिले कितने स्टार

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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जीवन जीने का सबक देती ‘हृदयपूर्वम’

हाल ही में मोहनलाल सर की हृदयपूर्वम फिल्म हिंदी डब में जियो हॉटस्टार पर रिलीज हुई है। मोहनलाल के साथ, मालविका मोहनन और संगीत प्रताप मुख्य भूमिकाओं में हैं। सत्यन अंतिकाड ने फिल्म का निर्देशन किया है। यह एक हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म है और फिल्म में अच्छे भावनात्मक दृश्य हैं। ये हमें भावुक कर देते हैं। अकेलेपन की समस्याओं को भी बखूबी दर्शाया गया है। हर किसी को जीवन में दूसरों को प्यार और स्नेह देने का काम करना चाहिए, क्योंकि जीवन एक बार ही मिलता है।

फिल्म में कथा इस प्रकार है कि संदीप (मोहनलाल) एक सफल व्यवसायी हैं। वह कोच्चि में एक क्लाउड किचन चलाते हैं। हाल ही में उनकी हृदय शल्य चिकित्सा हुई है और पुणे के एक कर्नल का हृदय उनमें प्रत्यारोपित किया गया है। जेरी (संगीत प्रताप) नाम का एक पुरुष नर्स संदीप की देखभाल के लिए अस्पताल से आता है। एक दिन कर्नल की बेटी हरिता (मालविका) उनसे मिलने पुणे से कोच्चि आती है और उन्हें अपनी सगाई में आमंत्रित करती है। हरिता के सगाई के लिए संदीप पुणे जाते है, तो उनके जीवन में जो कुछ बदलाव आते हैं, वही कहानी का बाकी हिस्सा है। संगीत प्रताप और मोहनलाल के बीच कॉमेडी सीन बहुत अच्छे हैं, दोनों की बॉन्डिंग बहुत अच्छी तरह से दिखाई गई है। संगीत सुनने लायक है, खासकर हिंदी डब गाने बहुत अच्छे से चुने गए हैं, गाने सुनने लायक हैं। मोहनलाल, संगीत प्रताप, कर्नल की पत्नी और मालविका, सभी ने खूबसूरत और अद्भुत काम किया है। यह फिल्म हमें हंसाती है, भावुक करती है, जीवन की समस्याओं को भी प्रस्तुत करती है और जीवन किस प्रकार जीने का सबक भी देती है।

स्वतंत्र स्त्री व सामाजिक न्याय के लिए लड़ती हुई वकील की कहानी- द ट्रायल

अपने जज पति पर यौनाचार के आरोपों और फिर उनके सिद्ध होने पर सजा हो जाने के बाद एक दस वर्ष की विवाहिता अपनी दो बच्चियों के साथ जीवन की फिर से शुरुआत करती है। एक लॉ फर्म में नौकरी से। वह और क्या करती, क्योंकि उसकी योग्यता एक अच्छे वकील की ही थी, विवाह से पहले। यह सीजन-1 की संक्षिप्त कहानी है।  

द ट्रायल, अमेरिकन कोर्ट ड्रामा सीरीज “द गुड वाइफ” पर आधारित है, जो एक सफल सीरीज थी। हिंदी सीरीज में लीड रोल यानी वाइफ के रोल में हैं, काजोल। हिंदी संस्करण में कहानी में राजनीति, कानून, प्रेम संबंधों, ऑफिस की कारगुजारियां और मानव मन की कुंठाएं, चालाकी, पारिवारिक मजबूरियां, बच्चों पर इन सबके प्रभावों को बड़ी चतुराई से शामिल किया गया है। अमेरिकन सीरीज को देखे हुए इतना अरसा हो गया है कि मैं बड़ी सुविधा से उसे भूला हुआ कह सकता हूं, इसलिए कोई तुलना नहीं कर सकता, लेकिन सीजन -2 में विशेषतः काजोल ने कहानी की कमान अपने हाथ में ली है और अच्छा अभिनय किया है, परंतु कुछ दूसरे कलाकार भी अदाकारी में पीछे नहीं है। जैसे- जज पति (जिस्सू सेनगुप्ता), लॉ फर्म की पार्टनर (शीबा चड्ढा), दूसरा पार्टनर (अली खान), महिला साथी मित्र (कुबरा सईद)। विशेष रोल में असरानी, गौरव पांडे (दोनों वकील) और नेता के रोल में सोनाली कुलकर्णी भी अच्छे लगे हैं। फर्म में पार्टनर्स में मनभेद होने से लेकर काजोल के युवावस्था में मित्र रहे अली खान से मधुर संबंधों और अपने पति के साथ प्रेम, घृणा, समझौता और विद्रोह को काजोल ने अच्छी तरह से दिखाया है। विवाहित जीवन में परस्पर विश्वास के टूटने पर पूरे परिवार पर उसका प्रभाव होता है। भारतीय परिवेश में पत्नियां बहुधा उसे भूलकर आगे बढ़ती हैं, परंतु इस कहानी में यह बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड होता जाता है।  निर्णयों से आप सहमत हो यह जरूरी नहीं।

द ट्रायल सिर्फ एक वकील की कहानी नहीं है, एक पत्नी, मां, स्वतंत्र स्त्री और सामाजिक न्याय के लिए लड़ती हुई वकील की कहानी है। परंतु लॉ फर्म में कानूनी मामलों की खोजबीन, कोर्टरूम ड्रामा और राजनीतिक चालबाजियां भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वे सब इसे घटनापूर्ण और गतिमान बनाती है। पटकथा, कैमरा वर्क, पार्श्व संगीत और गति की दृष्टि से सीरीज अच्छी बन पड़ी है, लेकिन सबसे मुख्य है, मुख्य चरित्रों की परफॉर्मेंसेस। इन सबके लिए देखिए, द ट्रायल।