बाराबंकी: नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद नहीं मिल रही नौकरी, भूख हड़ताल पर बैठे कई शिक्षक
बाराबंकी। उच्च न्यायलय के आदेश पर शुरू की गयी 69,000 सहायक अध्यापको की भर्ती में अब साक्ष्य प्रमाण का खेल शुरू हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा विभाग से नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद प्रथम चरण में 31,277 शिक्षक भर्ती में दो दर्जन नियुक्ति निरस्त किये जाने पर पीड़ित भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इन …
बाराबंकी। उच्च न्यायलय के आदेश पर शुरू की गयी 69,000 सहायक अध्यापको की भर्ती में अब साक्ष्य प्रमाण का खेल शुरू हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा विभाग से नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद प्रथम चरण में 31,277 शिक्षक भर्ती में दो दर्जन नियुक्ति निरस्त किये जाने पर पीड़ित भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
इन सभी 24 शिक्षकों की बीती 24 दिसम्बर तक शिक्षक कार्यालय पर उपस्थित दर्ज करायी गयी है। इन सभी का भारांक और गुणांक भी इनके पात्र होने का पुख्ता प्रमाण है। भूख हड़ताल कर रहे पीड़ितो का कहना है कि जिस कमेटी के प्रधान अधिकारी को उन सभी ने अपनी समस्या से अवगत कराया।
उक्त प्रकरण पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से बात किये जाने पर उनका कहना है कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के चलते अपात्रों की नियुक्ति हुई थी। जिसे सुधारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि कमेटी के जरिये ही सभी निर्णय लिये गये हैं। इसमें उनका सीधे सीधे निर्णय लेने का कोई अधिकार इस विषय में नहीं है।
बीएसए ने यह भी बताया की एडीएम और कमेटी के माध्यम से कार्यवाही की गयी है। विभाग की एक बात और सामने निकल कर आई है कि इन लोगों को रखे जाने पर वेतन का निर्वहन करना पड़ता। लेकिन प्रशासन का आदेश आने से पहले विभाग का जल्दबाजी में लिया गया निर्णय दो दर्जन शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ प्रतीत हो रहा है।
अन्य जिलों में हुईं नियुक्तियां
बाराबंकी जिले को छोड़ अन्य जिलो में भी ऐसी शिकायतें और त्रुटियां होने के कारण भूख हड़ताल पर बैठे पीड़ितो के पास पुख्ता प्रमाण हैं। जिसमें बाकी जिले की कामेटियों ने शिक्षकों को बहाल भी किया है। लेकिन बाराबंकी में सिर्फ उन्हें प्रताड़ित किये जाने के गंभीर आरोप लगाये गए हैं। साथ शासनादेश में भी तारीख का खेल हुआ है। उदाहरण के तौर पर प्रतिभा सिंह जो मसौली में बतौर शिक्षामित्र 18 मई 2009 से कार्यरत थी, उन्हें 28 मई 2018 तक दस वर्ष से कम दिखाया गया है।
शिक्षामित्र के प्रकरण
शिक्षामित्र के सेवारत रहते हुऐ संस्थागत स्नातक होने के प्रकरण में शासनादेश संख्या -2523/79-5-2012-282/98सी. जो 14 अगस्त 2012 के केस में लिया गया था। इसी क्रम में बिंदु संख्या 10 के पार्ट 2 में 10 वर्ष से कम अनुभव को महानिदेशक, स्कूल शिक्षा उ. प्र. सचिव को उपलब्ध कराये जाने पर शासन द्वारा पृथक निर्णय लिये जाने का प्रावधान है। उक्त प्रतिलिपि भी बीएसए द्वारा ही उपलब्ध करायी गयी। जो सवाल खड़े करता है की आखिर जिला स्तर पर इतनी बड़ी त्रुटि होने पर आखिर जिम्मेदारी किसकी बनती है।
