Kanpur News : NSI की निदेशक सीमा परोहा निलंबित, 725 पेड़ काटने के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद कार्रवाई
कानपुर, अमृत विचार। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की निदेशक प्रो सीमा परोहा को निलंबित कर दिया गया है। उन पर संस्थान में पेड़ काटने के मामले पर हाल ही में एफआईआर हुई थी। प्रो सीमा परोहा के निलंबन के बाद अब निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार अरविंद कुमार रावत को सौपा गया है। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में हाल ही में परिसर में लगभग 725 पेड़ों के कटने का मामला सामने आया था।
इसके बाद 27 मई को वन विभाग की टीम जब संस्थान जांच करने पहुंची तो निदेशक की अनुमति के बगैर गेट न खोलने की बात टीम में शामिल अधिकारियों से कही गई। जांच टीम को बगैर संस्थान में प्रवेश के वापस लौटना पड़ा। इसके बाद 30 मई को तक वन विभाग की टीम टीम का गठन किया गया। इसके बाद जब टीम संस्थान पहुंची तो निदेशक खुद पेड़ कटने की जगह पर वन विभाग की टीम को लेकर पहुंची।
जहां पर यह सामने आया कि वन विभाग को मिली शिकायत सही थी। मौके पर वन विभाग के अधिकारियों को पेड़ काटे जाने के अवशेष मिले। इसके बाद विभाग की टीम की ओर से तीन जून को संस्थान की निदेशक समेत अन्य पांच के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद से ही संस्थान में निदेशक के ऊपर इस पूरे मामले की गाज गिरना तय माना जा रहा था।
संस्थान में लगे प्रतिबंध
संस्थान के भीतर इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद संस्थान की ओर से कई प्रतिबंध भी लगाए गए। घटना के खुलासे के बाद बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश संस्थान परिसर में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया। खास बात यह है कि इस पूरे मामले में संस्थान के कर्मचारी संगठन से जुड़े सदस्यों ने ही शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच वन विभाग के अधिकारियों की ओर से की गई।
फार्म बनाने की योजना
एनएसआई परिसर में 655 बड़े वृक्ष और 67 बौने कनेर की अवैध कटान की गई थी। इनमें पोसोपिस, कंजी, नीम, कनेर, केसिया, श्यामिया, शीशम, यूकेलिप्टस, जंगल जलेबी, चिलबिल, सिरस, बॉटल ब्रश, गोल्ड मोहर, अरू, लसोढ़ा, छितवन, सुबबूल, गूलर के पेड़ हैं। 377 पेड़ों के अवशेष गए। जो छह महीने के भीतर में काटे गए थे।
इस स्थल पर फार्म बनाए जाने की जानकारी निदेशक ने निरीक्षण के दौरान दी थी। 250 पेड़ों को जेसीबी से उखाड़ा गया था। इसके अलावा परिसर में 95 पेड़ों के ठूंठ मिले। इन सभी पेड़ों की लकड़ियां गायब मिलीं। परिसर में कुछ भंडारित लकड़ियां मिलीं, जो 8 से10 महीने पुरानी थीं। सभी वृक्ष सरकारी संपत्ति थे। इन पेड़ों की लकड़ी की बिक्री से मिले रुपयों को राजकोष में जमा कराया जाने का प्रावधान है।
