Ayodhya News: राम मंदिर के लिए नई व्यवस्था पर दिल्ली में मंथन, निर्माण के लक्ष्य पर बना था ट्रस्ट, अब परिवर्तन संभव
राजेंद्र कुमार पांडेय, अयोध्या, अमृत विचार। श्रीराम मंदिर की व्यवस्था में बदलाव होगा। इसके लिए नई व्यवस्था पर मंथन नई दिल्ली में हो रहा है। मंथन दो बिंदुओं पर होने की खबर है। ट्रस्ट की व्यवस्था में परिवर्तन करके या नए सिरे नई व्यवस्था लागू करके। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के बदले सुर भी इस बात का संकेत है। चढ़ावा प्रकरण तो एक क्षेपक के रूप में सामने आया है या फिर लाया गया। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो राम मंदिर में व्यवस्था परिवर्तन को लेकर मंथन पहले से चल रहा है।
हालांकि चढ़ावा चोरी प्रकरण ने इसकी संभावनाओं को बल प्रदान कर दिया। जो काम देर में होता वह अब पहले हो जाएगा। मंदिर निर्माण का काम लगभग पूरा हो गया। ऐसा भी नहीं है कि श्रीराम मंदिर की व्यवस्था में क्या कुछ हो रहा है। इसकी जानकारी इतनी न सही तो किसी हद तक पहले से ही नागपुर और दिल्ली दरबार के संज्ञान में है। इसके बाद ही श्रीराम मंदिर के संचालन की नई व्यवस्था पर मंथन शुरू किया गया। मंथन में बड़े लोग शामिल बताए जाते हैं। यह लोग अपना सुझाव दिल्ली दरबार को देंगे।
गौर करने की बात यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन मंदिर निर्माण का लक्ष्य रख कर किया गया है। अब इसके तकनीकी पहलू पर भी विचार किया जा रहा है। आगे के संचालन के लिए इसे इसी तरह के स्वरूप में रख बदलाव करके व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए या फिर इसके स्थान पर कुछ नई व्यवस्था में कोई तकनीकी अड़चन तो नहीं है।
नई व्यवस्था में एक बिंदु सीधे ट्रस्ट से संचालन का है तो दूसरा बिंदु देश के कुछ अन्य मंदिरों की तरह सरकारी तंत्र से संचालन किए जाने की व्यवस्था से जुड़ा है। इनमें सीईओ की व्यवस्था शामिल है। इन विषयों पर बहुत गंभीरता से मंथन किए जाने की खबर है। हालांकि यहां इस पर कोई कुछ नहीं बोलता।
श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के अचानक बदले सुर से इस बात के संकेत मिलते हैं। मिश्र वह व्यक्तित्व हैं जो श्रीराम मंदिर के लिए दिल्ली दरबार के आंख, कान, नाक सब कुछ हैं। भले ही वह कुछ न बोले लेकिन उनका एक इशारा काफी था। याद कीजिए अब तक वह जब भी यहां के दौरे पर आए उन्होंने निर्माण के अलावा कभी किसी अन्य बिंदु से चर्चा से परहेज रखा।
अभी चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद पहली बार जब वह अयोध्या आए तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि उनका काम केवल मंदिर निर्माण देखना भर है, लेकिन अचानक उनके रुख में बदलाव आया और उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों के सामने चढ़ावा चोरी प्रकरण पर खुलकर बैटिंग शुरू कर दी। यहां तक कह डाला कि गिनती करने वालों को बिना जेब के कपड़े पहनकर जाना चाहिए। जामा तलाशी भी होनी चाहिए। चढ़ावे में चोरी कब से हो रही है कहा नहीं जा सकता है।
स्पष्ट निर्देश है कि व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए। जानकारों की मानें तो नृपेंद्र मिश्र मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष रहते यूं ही नहीं इस तरह खुलकर बोल रहे हैं। उन्हें कहीं न कहीं इसके लिए हरी झंडी है। सच तो यह है कि आगे की व्यवस्था को लेकर वह भी जमीन तैयार करनें में लग गए हैं। जल्दी नहीं लेकिन व्यवस्था में बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है।
