जमरानी बांध निर्माण रुका! हरदिन 10 हजार लीटर डीजल की जरूरत, मिल रहा सिर्फ 200 लीटर
इस आदेश की वजह से जमरानी बांध प्रोजेक्ट को नहीं मिल पा रहा है पर्याप्त डीजल
हल्द्वानी, अमृत विचार : जमरानी बांध प्रोजेक्ट में केंद्र के हाईस्पीड डीजल की बिक्री पर नियंत्रण ने रोक लगा दी है। अधिकतम 200 लीटर डीजल मिलने की वजह से जमरानी बांध का निर्माण प्रभावित हो रहा है जबकि यहां प्रतिदिन 10 हजार लीटर हाईस्पीड डीजल की जरूरत होती है। फिलहाल नैनीताल डीएम ने शासन को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट के लिए छूट देने की मांग की है ताकि पर्याप्त मात्रा में डीजल आपूर्ति हो और प्राेजेक्ट पर असर नहीं पड़े।
अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने बीती 11 जून को गजट नोटिफिकेशन जारी कर हाई स्पीड डीजल की बिक्री नियंत्रित करने का निर्णय लिया। इसके तहत एक बार में एक व्यक्ति/वाहन को अधिकतम 200 लीटर ही हाईस्पीड डीजल दिया जा सकता है। इधर, जमरानी बांध प्रोजेक्ट कुमाऊं का एक विशाल और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
इसमें डायवर्जन टनल की खुदाई, बांध की नींव, बुनियादी ढांचे का निर्माण सहित कई मोर्चों पर निर्माण किया जा रहा है जिसमें भारी मात्रा में हाईस्पीड डीजल की जरूरत होती है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन 10 हजार लीटर हाईस्पीड डीजल की आवश्यकता होती है लेकिन केंद्र के नियंत्रण की वजह से पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है इस वजह से जमरानी बांध का निर्माण प्रभावित हो रहा है।
इसके बाद जमरानी बांध के प्रोजेक्टर मैनेजर ने इस समस्या को जिला प्रशासन के समक्ष उठाया और पर्याप्त मात्रा में डीजल आपूर्ति की मांग की है। प्रोजेक्ट मैनेजर ने नैनीताल डीएम ललित मोहन रयाल को पत्र लिखकर प्रतिदिन 10 हजार लीटर हाईस्पीड डीजल दिलाए जाने की मांग की है। इसके बाद डीएम रयाल ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर जमरानी बांध प्रोजेक्ट को नियंत्रण में छूट देने की मांग की है ताकि 10 हजार लीटर डीजल मिल सके और काम जारी हो सके।
जमरानी बांध प्रोजेक्ट की विशेषताएं
1.जमरानी बांध 9 किमी लंबा और 130 मीटर चौड़ा होगा
2.इस बांध में करीब 142.3 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा होगा
3.लगभग 57065 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसमें 9458 हेक्टेयर जमीन उत्तराखंड और 47607 हेक्टेयर जमीन उत्तर प्रदेश की है।
4.उत्तराखंड में नैनीताल और उधम सिंह नगर, उत्तर प्रदेश में रामपुर और बरेली जिलों को पर्याप्त पेयजल मिलेगा।
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