राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : SIT की रिपोर्ट ने खोले दान प्रबंधन के राज, ट्रस्ट पर उठे गंभीर सवाल, चंपत राय भी निशाने पर
एफआईआर समेत पांच साल के ऑडिट और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश
लखनऊ, अमृत विचार। अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने मंदिर की दान प्रबंधन प्रणाली और बैंकिंग व्यवस्था की कई कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया है। लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपनी 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट जैसे ही अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी, एक-एक सच्चाई बाहर आने लगी।
इसमें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्र और निर्माण सहायक गोपाल राव समेत इनके हर एक गुर्गे का पूरा हिसाब दर्ज है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी की घटना को केवल व्यक्तिगत गबन का मामला नहीं, बल्कि निगरानी और प्रबंधन प्रणाली की गंभीर चूक बताया गया है। एसआईटी ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, दानपात्रों की सुरक्षा, कर्मचारियों की तैनाती और बैंकिंग समन्वय व्यवस्था में कई कमियों की ओर संकेत किया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि दानपात्रों की चाबियों के संचालन, नकदी के मिलान और रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं थी। कुछ मामलों में दस्तावेजी रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बयानों में भी अंतर पाया गया है। एसआईटी ने इस कारण जांच का दायरा और बढ़ाने की जरूरत बताई है।
सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आपराधिक जिम्मेदारी तय होने वाले मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। साथ ही पिछले पांच वर्षों में प्राप्त चढ़ावे का विशेष ऑडिट कराने, दान राशि की गणना का नियमित परीक्षण और वित्तीय निगरानी प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया गया है।
पांच आरोपितों की निशानदेही में मिले हैं 2 करोड़
अब तक की जांच में पांच आरोपितों की निशानदेही पर लगभग दो करोड़ रुपये की बरामदगी हो चुकी है। एसआईटी ने करीब 150 लोगों से पूछताछ करने और बड़ी संख्या में दस्तावेजों का परीक्षण करने की जानकारी भी अपनी रिपोर्ट में दी है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि मंदिर में चढ़ावे की गणना और जमा प्रक्रिया को अधिक पेशेवर बनाया जाए, सीसीटीवी डेटा का संरक्षण बढ़ाया जाए और दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को तकनीक आधारित निगरानी से जोड़ा जाए।
शासन स्तर से रिपोर्ट का परीक्षण शुरू
मंगलवार को लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने दो अन्य सदस्यों के साथ मंगलवार को अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी। शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है और एसआईटी की जांच अभी जारी है। कई दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिकाओं की पड़ताल अभी बाकी है। अंतिम रिपोर्ट में कुछ और तथ्यों के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
अब दिल्ली की ओर टिकी निगाहें
अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आगे की कार्रवाई को लेकर अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच रिपोर्ट रविवार को दिल्ली भेज दी गई थी। चूंकि मामला केंद्र सरकार की ओर से गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए किसी भी बड़े फैसले से पहले केंद्र सरकार, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और संघ स्तर पर भी विस्तृत विचार-विमर्श की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इसी कारण अंतिम निर्णय में कुछ समय लग सकता है। सूत्र यह भी बताते हैं कि केवल आपराधिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव, पेशेवर प्रबंधन प्रणाली लागू करने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
