Ram Mandir Donation Controversy : हिंदू वोटरों तक पहुंच बनाने की रणनीति में जुटी सपा, PDA सम्मेलनों में उठाएगी राम मंदिर चंदा विवाद का मुद्दा
राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा के हिंदुत्व नैरेटिव को चुनौती देने की रणनीति बनाई है। सपा गांव-गांव पीडीए सम्मेलनों के जरिए इस मुद्दे को उठाकर हिंदू मतदाताओं तक पहुंच बनाने की तैयारी में है।
लखनऊ। राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसे राजनीतिक अभियान का अहम हिस्सा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का लक्ष्य गांव-गांव आयोजित होने वाले पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलनों के माध्यम से इस मुद्दे को जनता तक पहुंचाना और भाजपा के हिंदुत्व नैरेटिव को चुनौती देना है।
इसी रणनीति के तहत सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी सरकार बनने पर अयोध्या को 'सियाराम धाम' के रूप में विकसित किया जाएगा और अयोध्यावासियों के अधिकारों की पुनर्स्थापना की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश केवल विकास का वादा नहीं, बल्कि हिंदू मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश भी है।
गांव-गांव उठेगा चंदा विवाद का मुद्दा
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, सपा अब अपने पारंपरिक पीडीए समीकरण से आगे बढ़कर राम मंदिर चंदा विवाद को विधानसभा और बूथ स्तर तक ले जाएगी। पीडीए सम्मेलन और पंचायतों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा, ताकि भाजपा के सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श का जवाब दिया जा सके। रणनीतिकारों का मानना है कि यह अभियान सामाजिक न्याय के मुद्दे को मजबूत करने के साथ-साथ उन मतदाताओं तक भी पहुंचने का प्रयास है, जो अब तक भाजपा के समर्थन में रहे हैं।
प्रदेशभर में चल रहे हैं पीडीए सम्मेलन
समाजवादी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के कार्यकर्ता वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, गाजियाबाद, आगरा और बलिया सहित कई जिलों में पीडीए पंचायतें और प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर चुके हैं। पार्टी का अगला बड़ा प्रशिक्षण शिविर 3 जुलाई को लखनऊ में प्रस्तावित है।
राजीव राय बोले- निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
सपा के राष्ट्रीय सचिव और सांसद राजीव राय ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य संविधान, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जब मामला जनता की आस्था और सार्वजनिक धन से जुड़ा हो, तो हर आरोप की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वाहिनी के हजारों कार्यकर्ता घर-घर जाकर अयोध्या से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर चंदा विवाद पर लोगों से संवाद कर रहे हैं।
हिंदू वोट बैंक में बढ़त की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंदा विवाद पर लगातार मुखर होकर अखिलेश यादव यह संदेश देना चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी केवल पीडीए राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि हिंदू मतदाताओं के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में राम मंदिर चंदा विवाद आगामी चुनावी राजनीति में एक अहम मुद्दा बन सकता है।
