Gold Price Crash : एक हफ्ते में ₹5,000 से ज्यादा टूटा सोना, चांदी ₹15,000 से अधिक हुई सस्ती
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता कम होने और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार, एक सप्ताह में 24 कैरेट सोना 5,097 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 15,432 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई।
आईबीजेए के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई, जबकि पिछले सप्ताह इसका भाव 1,44,970 रुपये था। इसी तरह 22 कैरेट सोना 1,32,793 रुपये से घटकर 1,28,124 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 1,08,728 रुपये से फिसलकर 1,04,905 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
इस सप्ताह सोने का उच्चतम और न्यूनतम भाव
आईबीजेए के अनुसार, इस सप्ताह 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 22 जून की सुबह 1,47,310 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 25 जून की शाम 1,39,461 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।
चांदी में भी आई बड़ी गिरावट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज नरमी देखने को मिली। इस सप्ताह चांदी 15,432 रुपये प्रति किलो सस्ती होकर 2,16,541 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जबकि पिछले सप्ताह इसका भाव 2,31,973 रुपये प्रति किलो था। सप्ताह के दौरान चांदी का उच्चतम भाव 22 जून की शाम 2,37,801 रुपये प्रति किलो और न्यूनतम भाव 25 जून की सुबह 2,15,485 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।
क्यों गिरे सोने और चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में तनाव कम होने, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने या बढ़ाने के संकेत तथा डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। इसके चलते निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में तेज गिरावट दर्ज हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस और चांदी 60 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार कर रही है। इसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
एक महीने में कितना टूटा बाजार?
बीते एक महीने के दौरान सोने की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत और चांदी में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी फेड की मौद्रिक नीति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
