Sonam Wangchuk Hunger Strike : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। यह जानकारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए दी। अभिजीत दिपके ने अपनी पोस्ट में कहा कि "सोनम वांगचुक विद्यार्थियों को न्याय दिलाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।"
राजघाट से शुरू हुआ विरोध
भूख हड़ताल शुरू करने से पहले सोनम वांगचुक राजघाट पहुंचे, जहां उनके साथ सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और सौरव दास भी मौजूद रहे। इसके बाद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई।
जंतर-मंतर पहुंचने की अपील
रविवार सुबह अभिजीत दिपके ने लोगों से सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई किसान नेताओं को नजरबंद किया जा रहा है, ताकि वे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में हिस्सा न ले सकें। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
किसानों का भी मिला बड़ा समर्थन
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता दीपक बालियान ने बताया कि आंदोलन को देशभर के 650 से अधिक किसान संगठनों का समर्थन मिल चुका है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए किसान भी इस लड़ाई में साथ आए हैं। इसी के तहत आज दिल्ली में एक बड़ी खाप पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा होगी।
यह हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार इन मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक ने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ यह आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि छात्रों को न्याय दिलाने के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
