क्या गोद में लैपटॉप रखकर काम करते हैं? जानिए कैसे बढ़ सकता है त्वचा, रीढ़ और आंखों की समस्याओं का खतरा
वर्क फ्रॉम होम की आदत बन सकती है सेहत के लिए नुकसानदेह, विशेषज्ञों ने बताया सही पोश्चर और सुरक्षित तरीके से काम करने का तरीका
लखनऊः वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल लाइफस्टाइल के बढ़ते चलन ने लोगों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आज बड़ी संख्या में लोग घर के सोफे, बिस्तर या कुर्सी पर बैठकर घंटों लैपटॉप पर काम करते हैं। सुविधा और आराम के लिए कई लोग लैपटॉप को सीधे अपनी गोद में रख लेते हैं। पहली नजर में यह तरीका आसान और आरामदायक लगता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
त्वचा पर पड़ सकता है बुरा असर
लैपटॉप लंबे समय तक चलने पर काफी गर्म हो जाता है, जब इसे सीधे गोद या पैरों पर रखा जाता है, तो उसकी गर्मी त्वचा तक लगातार पहुंचती रहती है। इससे त्वचा पर लालपन, जलन या खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से ‘टोस्टेड स्किन सिंड्रोम’ जैसी स्थिति भी विकसित हो सकती है। इस स्थिति में त्वचा पर जालीनुमा भूरे या काले निशान बनने लगते हैं, जिन्हें ठीक होने में काफी समय लग सकता है।
गर्दन, पीठ और कंधों में बढ़ सकता है दर्द
गोद में लैपटॉप रखने पर स्क्रीन सामान्य से काफी नीचे होती है। ऐसे में स्क्रीन देखने के लिए व्यक्ति को लगातार गर्दन झुकानी पड़ती है। लंबे समय तक इस स्थिति में बैठे रहने से गर्दन, कंधों और पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे यह दर्द स्थायी रूप ले सकता है और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। गलत पोश्चर के कारण थकान और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
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हाथों और कलाई पर दबाव
जब लैपटॉप गोद में रखा होता है, तो कीबोर्ड और टचपैड का इस्तेमाल स्वाभाविक स्थिति में नहीं हो पाता। इससे हाथों और कलाई को असहज कोण पर रखना पड़ता है। लगातार इसी मुद्रा में टाइपिंग करने से कलाई में दर्द, उंगलियों में अकड़न और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से रिपीटिटिव स्ट्रेन इंजरी (RSI) जैसी परेशानी भी हो सकती है।
प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर भी बरतें सावधानी
लैपटॉप की गर्मी और उसे लंबे समय तक गोद में रखने को लेकर पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी कई शोध किए गए हैं। कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि लगातार अधिक तापमान के संपर्क में रहने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन विशेषज्ञ एहतियात के तौर पर लैपटॉप को सीधे गोद में रखने से बचने की सलाह देते हैं।
आंखों और मानसिक थकान की भी समस्या
गोद में लैपटॉप रखकर काम करने पर स्क्रीन और आंखों के बीच की दूरी भी अक्सर सही नहीं रहती। इससे आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार बिना ब्रेक के काम करने से मानसिक थकान और एकाग्रता में भी कमी आ सकती है।
कैसे करें सुरक्षित तरीके से काम
- यदि आपको लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करना है, तो सही कार्यस्थल बनाना सबसे अच्छा विकल्प है। हमेशा मेज और कुर्सी का उपयोग करें ताकि आपकी स्क्रीन आंखों के बराबर ऊंचाई पर रहे। यदि डेस्क उपलब्ध न हो तो लैपटॉप स्टैंड, कुशन ट्रे या लैप डेस्क का इस्तेमाल करें, जिससे लैपटॉप की गर्मी सीधे शरीर तक न पहुंचे।
- हर 30 से 40 मिनट के बाद कुछ मिनट का ब्रेक जरूर लें। इस दौरान थोड़ा टहलें, शरीर को स्ट्रेच करें और आंखों को आराम दें। बैठने की मुद्रा समय-समय पर बदलते रहें और कंधों को सीधा रखें। यदि संभव हो तो अलग कीबोर्ड और माउस का उपयोग करें, जिससे हाथों और कलाई पर कम दबाव पड़े।
- लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना भले ही सुविधाजनक लगे, लेकिन यह आदत त्वचा, मांसपेशियों, रीढ़, कलाई और आंखों सहित शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है। थोड़ी-सी सावधानी, सही बैठने की आदत और नियमित ब्रेक लेकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। बेहतर होगा कि काम के दौरान अपने आराम के साथ-साथ स्वास्थ्य को भी समान महत्व दें, क्योंकि स्वस्थ शरीर ही बेहतर कार्यक्षमता की सबसे बड़ी कुंजी है।
विशेषज्ञों के अनुसार लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी, गलत बैठने की मुद्रा और लगातार एक ही स्थिति में काम करना शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए यदि आप रोजाना कई घंटे लैपटॉप पर काम करते हैं, तो सही तरीके से बैठना और उचित उपकरणों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।
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