बोध कथा : सच्ची दौलत

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Published By Anjali Singh
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एक छोटे से गांव में दो मित्र रहते थे- मोहन और सोहन। दोनों बचपन से साथ पढ़े, खेले और बड़े हुए। समय के साथ मोहन मेहनत करके एक सफल व्यापारी बन गया, जबकि सोहन गांव में रहकर खेती करने लगा। मोहन के पास धन-दौलत, बड़ा मकान और कई नौकर-चाकर थे, जबकि सोहन साधारण जीवन जीता था। फिर भी उसके चेहरे पर हमेशा संतोष और मुस्कान रहती थी।

एक दिन मोहन कई वर्षों बाद गांव आया। उसने देखा कि सोहन पुराने घर में रह रहा है और साधारण कपड़े पहनता है। मोहन ने हंसते हुए कहा, “तुमने पूरी जिंदगी मेहनत की, लेकिन तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है। अगर मेरी तरह शहर जाकर व्यापार किया होता, तो आज अमीर होते।” सोहन मुस्कुराया और बोला, “धन ही सब कुछ नहीं होता, मित्र। मेरे पास परिवार का प्यार, गांव का सम्मान और मन की शांति है।”

मोहन ने उसकी बात को हल्के में लिया। अगले दिन दोनों पास के जंगल में घूमने निकले। अचानक रास्ते में तेज बारिश शुरू हो गई। मोहन के महंगे कपड़े भीग गए और वह परेशान हो गया। तभी सोहन ने पास की एक झोपड़ी में शरण ली। वहां रहने वाले एक गरीब बुजुर्ग ने दोनों को सूखे कपड़े दिए, गर्म खाना खिलाया और रात भर आराम करने की जगह भी दी। सुबह मोहन ने बुजुर्ग से पूछा, “आप हमें जानते भी नहीं थे, फिर भी इतनी मदद क्यों की?” बुजुर्ग मुस्कुराकर बोले, “बेटा, इंसान की सबसे बड़ी पूंजी उसका दयालु स्वभाव होता है। धन कभी भी साथ छोड़ सकता है, लेकिन अच्छे कर्म और लोगों का विश्वास जीवनभर साथ रहते हैं।”  

यह बात मोहन के दिल को छू गई। उसे एहसास हुआ कि उसने धन कमाने की दौड़ में रिश्तों और इंसानियत की कीमत को कम आंक लिया था। गांव लौटकर उसने सोहन से कहा, “आज समझ आया कि अमीरी केवल पैसे से नहीं होती। सच्चा अमीर वही है, जिसके पास प्रेम, संतोष और दूसरों की मदद करने का भाव हो।” उस दिन के बाद मोहन ने अपने व्यवहार में बदलाव लाया। उसने जरूरतमंद लोगों की सहायता शुरू की और अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने लगा। धीरे-धीरे उसे वह खुशी मिलने लगी, जो अपार धन होने के बावजूद कभी नहीं मिली थी। कहानी से शिक्षा मिलती है- धन-संपत्ति से अधिक मूल्यवान अच्छे संस्कार, संतोष, दया और मानवता होती है। सच्ची दौलत वही है, जो दूसरों के जीवन में भी खुशियां बांट सके।