सुप्रीमकोर्ट के जजों को आदेश... हवा में कागज उछाले और चीफ जस्टिस के लिए अभद्र भाषा! देश की सर्वोच्च अदालत में यूपी के एक और वकील का कारनामा 

Amrit Vichar Network
Edited By Ateeq Khan
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वकील की हरकत पर न्याधीशों ने जताई सहानुभूति, कार्रवाई से इनकार

सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ सुनवाई कर रही थी। वकील प्रबल प्रताप, जोकि खुद की पिटीशनर भी हैं-अपने केस की पैरवी के लिए खड़े हुए। बोले-मिस्टर न्यायिक सर्वेंट। मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ के एसपीपी विकासनगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। वकील के आदेशात्मक लहजे पर कोर्ट में सन्नाटा छा गया। बेंच से लेकर दूसरे वकील तक, सब के सब हैरान रह गए। जस्टिस केवी विश्वनाथ ने पूछा-आप हमें आदेश दे रहे हैं? इस पर वकील प्रबल प्रताप आपा खो बैठे। हवा में फाइल उछाली और मुख्य न्यायाधीश के लिए अभद्र भाषा बोलने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने दौड़कर वकील को पकड़ा और बाहर लेकर आए।

अमृत विचार : सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता वकील, न्यायाधीशों को ही आदेश देना लगा। शायद यह पहली घटना है, जब देश की सर्वोच्चल अदालत में खड़ा होकर कोई व्यक्ति जजों को ही आदेश दे रहा हो। हालांकि वह आदेश देने तक ही नहीं थमा। अचानक आपा खो दिया। न्यायाधीशों की तरफ फाइल के कागज उछाले। मुख्य न्यायाधीश के लिए अभद्र भाषा बोली। इससे पहल वह कोई और कांड करता, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़कर बाहर निकाला। वकील की इस करतूत से कोर्टरूम के अंदर सन्नाटा छा गया। वकील का नाम प्रबल प्रताप है, जो यूपी का रहने वाला है। कोर्टरूम में वकील की इस करतूत से लेकर उसके केस पर एक नजर डालते हैं। 

कोर्टरूम में क्या हुआ


सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ सुनवाई कर रही थी। वकील प्रबल प्रताप, जोकि खुद की पिटीशनर भी हैं-अपने केस की पैरवी के लिए खड़े हुए। बोले-मिस्टर न्यायिक सर्वेंट। मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ के एसपीपी विकासनगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। वकील के आदेशात्मक लहजे पर कोर्ट में सन्नाटा छा गया। बेंच से लेकर दूसरे वकील तक, सब के सब हैरान रह गए। जस्टिस केवी विश्वनाथ ने पूछा-आप हमें आदेश दे रहे हैं? इस पर वकील प्रबल प्रताप आपा खो बैठे। हवा में फाइल उछाली और मुख्य न्यायाधीश के लिए अभद्र भाषा बोलने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने दौड़कर वकील को पकड़ा और बाहर लेकर आए।

कार्रवाई नहीं सहानुभूति जताई 


सुप्रीमकोर्ट की बेंच ने वकील प्रबल प्रतात की इस हरकत पर उसके प्रति सहानुभूति जताई। जस्टिस केवी विश्वनाथ ने कहा कि-वह काफी परेशान है और यह सब उसकी हताशा दिखाता। हम उससे सहानुभूति है। उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं चाहते। 


नौकरी से निकालने गए प्रबल प्रताप


एडवोकेट प्रबल प्रताप लखनऊ के जानकीपुर में एक किराये के मकान में रहता था। एक कंपनी में जॉब के दौरान महिला कर्मचारी ने उस पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस कारण कंपनी ने उसे निकाल दिया था। उसी कंपनी के खिलाफ प्रबल प्रताप कोर्ट गए। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक का रुख किया और यहां आखिर में उन्होंने ये कांड कर दिया। 

कंपनी पर एफआईआर की मांग 


प्रबल प्रताप कंपनी के खिलाफ पहले कस्टम कोर्ट गया। कोर्ट ने याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज किया। लेकिन प्रबल कंपनी के खिलाफ एफआईआर की मांग पर अड़ा रहा। इसी मामले में हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीमकोर्ट में पिटीशन फाइल की। इस तरह सुप्रीमकोर्ट में उसने कोर्टरूम में हंगामा कर दिया। 

पिछले साल फेंका था जूता 


सुप्रीमकोर्ट में पिछले साल यूपी के ही एक वकील ने सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की तरफ जूता उछाला था। 6 अक्टूबर 2025 की घटना के दौरान भी सुरक्षाकर्मी उसे आरोपी वकील को खींचकर बाहर ले गए थे। हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने उस मामले में भी आरोपी वकील के खिलाफ एक्शन नहीं लिया था। बाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सुप्रीमकोर्ट बार एसोसिएशन ने वकील का लाइसेंस और सदस्यता दोनों खत्म कर दी थीं। 

न्यायाधीश को सर्वेंट नहीं कह सकते

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट शिरीष मेहरोत्रा ने इस घटना को लेकर कहा कि वकील जरूर पीड़ित हो सकते हैं लेकिन उनका तरीका पूरी तरह से गलत था। यह अनुशासनहीनता का कृत्य है। बार काउंसिल इस पर कड़ा कदम उठा सकती है। न्यायाधीशों को मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट का संबोधन भी ठीक नहीं है। पहली बात तो ये कि जज या टीचर सर्वेंट नहीं हैं। वह स्वतंत्र हैं। 

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