उफान पर सरयू-घाघरा : अयोध्या के 11 गांव प्रभावित, बहराइच से बलिया तक राहत कैंपों में भीड़

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में सरयू-घाघरा के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शुक्रवार को फर्रूखाबाद, बहराइच और बलिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राहत शिविरों की व्यवस्थाओं का लाइव जायजा लिया और बाढ़ प्रभावितों से सीधे संवाद कर जमीनी स्थिति जानी। उधर, अयोध्या में 2,370 राहत किट और 1,450 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं, जबकि आजमगढ़ में घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। सरकार ने महिलाओं, बच्चों और वृद्धजनों के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

अयोध्या में सरयू (घाघरा) का जलस्तर बढ़ने के बावजूद प्रमुख तटबंध सुरक्षित हैं। जिले के 11 गांव प्रभावित हैं। तहसील सदर में 1,500, रुदौली में 645 और सोहावल में 225 समेत 2,370 राहत किट बांटी गई हैं। साथ ही 1,450 लंच पैकेट और पशुओं के लिए 350 कुंतल भूसा वितरित किया गया है। जिले में 14 बाढ़ शरणालय और 10 बाढ़ चौकियां स्थापित हैं। सोहावल के सहारा बाग शरणालय में 100 प्रभावित रह रहे हैं और 18 नावें संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग की 37 टीमों ने 1,224 ओआरएस पैकेट और 2,912 क्लोरीन टैबलेट बांटे हैं, जबकि पशु चिकित्सा विभाग की 21 टीमें सक्रिय हैं। सरयू का जलस्तर 20 अगस्त रात आठ बजे 93.040 मीटर था, जो 92.730 मीटर के खतरे के निशान से 0.310 मीटर ऊपर है।

बहराइच में जलस्तर घटा, घर लौट रहे परिवार

बहराइच के कम्पोजिट विद्यालय आनंद नगर बरखड़िया, मिहींपुरवा स्थित राहत शिविर में राहत आयुक्त ने उप जिलाधिकारी मोनालिसा जौहरी से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और प्रभावित शिवकुमार निषाद से संवाद किया। उन्होंने बताया कि शिविर में चारपाई, गद्दा, नाश्ता और भोजन सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जलस्तर कम होने के बाद प्रभावित परिवार घरों को लौट रहे हैं और प्रशासन उन्हें राशन किट सहित आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहा है।

फर्रूखाबाद में छह सदस्यीय परिवार एक अगस्त से शिविर में

फर्रूखाबाद के रहमानिया इंटर कॉलेज राहत शिविर में अब्दुल गफ्फार खान ने बताया कि वह परिवार के छह सदस्यों के साथ एक अगस्त से शिविर में रह रहे हैं। भोजन, पानी, साफ-सफाई और दवाओं की सुविधाएं समय से मिलने की जानकारी उन्होंने दी।

बलिया में महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष इंतजाम

बलिया के गोपल नगर टांडी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्थित राहत शिविर में पप्पू यादव ने बताया कि तीनों समय भोजन, स्वच्छ पानी, सफाई और दवाओं की व्यवस्था है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

आजमगढ़ में घाघरा खतरे के निशान के करीब

आजमगढ़ में घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। उल्टहवा गेज पर जलस्तर 76.30 मीटर, जबकि खतरे का निशान 76.60 मीटर है। बदरहुआ में जलस्तर 72.00 मीटर पहुंचकर 71.68 मीटर के निशान से ऊपर है। सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। राहत आयुक्त ने तीनों जिलों में भोजन, पानी, सफाई और चिकित्सा व्यवस्था लगातार बनाए रखने तथा महिलाओं, बच्चों और वृद्धजनों के लिए जरूरत के अनुसार अतिरिक्त इंतजाम करने के निर्देश दिए।

सरयू का जल स्तर स्थिर, बढ़ गई बाढ़ प्रभावितों की समस्या

सरयू का जलस्तर लगभग स्थिर है। बाढ़ प्रभावितों की समस्या बढ़ गई है। कछार के गांवों के घरों में पानी या फिर सीलन चढ़ गई है। घर का सामान नष्ट हो गया। पानी भरे होने से खड़ी फसलें सड़ रही है। बाढ़ प्रभावित इलाके में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। सरयू लाल निशान से 27 सेमी. ऊपर बह रही है। जल स्तर घटने की रफ्तार बहुत धीमी है। चार दिन से कछार में जल भराव की स्थिति है। अब खड़ी फसलों को ग्रहण लग गया है। यह धीरे-धीरे नष्ट होने लगी है। बाढ़ का पानी तुरंत निकल जाने पर तो फसलें बच जाती है लेकिन जलजमाव से यह खराब हो जाती है। अब कमोवेश ऐसी ही स्थिति है। 

सैकड़ों घरों में भर गया पानी, राहत शिविर में बढ़ गई भीड़

बाढ़ प्रभावित रुदौली, सोहावल और सदर तहसील के गांवों से पानी अभी उतरा नहीं है। बाढ़ प्रभावित परिवार या तो ऊंचे स्थान पर शरण लिए हैं या फिर भोजन के लिए बाढ़ शिविर में जा रहे हैं। जानवरों के लिए चारे का संकट है तो बाढ़ प्रभावितों के लिए भी भोजन बनाने का संकट है। कई दिन से जलभराव और दूषित हुए पेयजल के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। सदर तहसील के बाढ़ प्रभावित इलाके में तीन दिन से लोग बीमार बताए गए हैं। प्रशासनिक कार्रवाई चल रही है। लेकिन एक अनार सौ बीमार जैसी स्थिति बताई गई है।

मांझाकला में आवागमन को लगाए गए आठ नाव व पांच स्टीमर

सरयू का पानी मांझाकला के आठ पुरवों में घुसने से कई परिवार बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन से प्रभावितों के लिए सहारा बाग में राहत शिविर बनाया है। जहां भोजन, नाश्ता, मिठाई, ठंडा पानी, चारपाई, गद्दे, कूलर, पंखे और शौचालय समेत तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुबह-शाम नाश्ते के साथ भोजन में पूड़ी-सब्जी, दाल-चावल और मिठाई में कालाजाम भी दिया जा रहा है। इसके बावजूद अधिकांश लोग शाम होते ही शिविर में रुकने के बजाय वापस अपने जलमग्न घरों की ओर लौट जा रहे हैं। महिलाओं और बच्चों का आलम है कि घर से नहीं निकल रही।

राहत शिविर में करीब 125 चारपाइयों पर गद्दे बिछाए गए हैं। चार बड़े कूलर, आधा दर्जन से अधिक फर्राटा पंखे और प्रकाश एवं महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग शौचालय और आरओ का ठंडा पानी उपलब्ध है। रसोई में चाय-नाश्ते की व्यवस्था बदस्तूर जारी है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न व खाना पकाने की सामग्री वाली 125 राहत किट वितरित की हैं। चिकित्सा शिविर भी लगाया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व, एसडीएम सोहावल गजेंद्र सिंह, तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह और नायब तहसीलदार रेशू जैन लगातार राहत शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। राजस्व निरीक्षक राम अभिलाष यादव, लेखपाल विशाल सिंह समेत राजस्व कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।

मांझाकला में आवागमन के लिए आठ नाव और पांच स्टीमर लगाए गए हैं। करीब 200 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। अपील की जा रही है कि घर छोड़कर राहत शिविर में आ जाएं। इसके बावजूद महिलाएं और बच्चे जलमग्न गांव में ही रहने के बदले शिविर में आने को तैयार नही हैं।एसडीएम गजेंद्र सिंह ने बताया कि स्टीमर के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। ग्रामीणों से घरों से निकलकर सहारा बाग राहत शिविर में आने की अपील की 

डीएम ने किया बाढ़ प्रभावित सलेमपुर, मूड़ाडीहा क्षेत्र का निरीक्षण

जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित सलेमपुर, मुड़ाडीहा का स्थलीय निरीक्षण किया। बाढ़ प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जा रही राहत एवं सुविधाओं का जायजा लिया। डीएम पहले दशरथ समाधि स्थल स्थित बाढ़ राहत केंद्र पहुंचे। वहां उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता को परखा। बाढ़ प्रभावित लोगों से संवाद किया। उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। अफसरों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री का समय से वितरण किया जाए। भोजन की गुणवत्ता में कमी न हो।

प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने, क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस क्षेत्र में पशुओं के समयबद्ध टीकाकरण और पशुपालकों को पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं। बीमार एवं जरूरतमंद लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश सीएमओ को दिया। उनके साथ एडीएम (वि/रा) अमित कुमार भट्ट, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र भिटौरिया, उप जिलाधिकारी आनंद कुमार तिवारी, तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह एवं जिला आपदा विशेषज्ञ यथार्थ तिवारी सहित अन्य लोग थे।

डीएम बोले-स्थिति नियंत्रण में, राहत कार्य जारी

सरयू (घाघरा) नदी के जलस्तर में वृद्धि के बावजूद पहले से की गई तैयारी और सतर्कतासे जिले में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति पर पूरा नियंत्रण है। जिले में घाघरा नदी पर बने रौनाही और अयोध्या-बिल्वहरिघाट तटबंध सुरक्षित है। तमसा नदी (मडहा) पर गोशाईगंज शहर की सुरक्षा के लिए बनाया गया तटबंध भी सुरक्षित है। इस समय जिले में कुल 11 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।

14 शरणालय, 10 बाढ़ चौकियां तैयार, 18 नावों से निगरानी व आवागमन

इनमें तहसील सदर के चार ग्राम मांझा मूडाडीहा अयोध्या, मांझा मड़ना, मांझा रामपुरपुवारी और मांझा काजीपुर, तहसील सोहावल का एक ग्राम मांझा कला और तहसील रुदौली के छह गांव मुजेहना मजरे सरायनासिर, पूरे महंगू मजरे पसौवा, पूरे महंगू मजरे सण्डरी, अब्बूपुर मजरे बरई, कैथी मांझा मजरे कैथी और सुलेमपुर मजरे उधरीरा शामिल हैं। अब तक 2370 बाढ़ राहत किट वितरित की गई। 1450 लंच पैकेट और प्रभावित पशुओं के चारे के लिए 350 कुंतल भूसा वितरित किया गया है।

जिले में कुल 14 बाढ़ शरणालय चिन्हित हैं। 18 नाव संचालित की जा रही है। सहारा बाग में बाढ़ शरणालय/शेल्टरहोम क्रियाशील है, जहां 100 बाढ़ प्रभावित व्यक्ति रह रहे हैं। कुल 10 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों पर राजस्व, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। आवागमन के लिए 18 नावें भी संचालित की जा रही हैं।

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