नेपाल में बारिश से उफान पर गंडक नदी, कुशीनगर के गांव में कटान और बांध पर बढ़ा खतरा  

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Edited By Anjali Singh
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कुशीनगर। बडी़ गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बावजूद जिले के छितौनी तटबंध स्थित स्पर-ए पर नदी का दबाव शुक्रवार को भी बना रहा। नदी की धारा से क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने के लिए बाढ़ खंड की टीम लगातार बचाव कार्य में जुटी रही। स्थिति का जायजा लेने बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता जयप्रकाश सिंह और अधिशासी अभियंता महेश सिंह मौके पर पहुंचे तथा बचाव कार्य का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 

नदी के दबाव को कम करने के लिए तार की जाली

मदनपुर सुकरौली और सिसई दधीच गांव के पास तटबंध के किलोमीटर 4/5 के बीच स्थित स्पर-ए के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत एसडीओ संजय कुमार गौड़ के नेतृत्व में कराई जा रही है। नदी के दबाव को कम करने के लिए तार की जाली (क्रेट) में बड़े पत्थर भरकर सुरक्षा परत तैयार की जा रही है। बाढ़ खंड की टीम लगातार मौके पर निगरानी बनाए हुए है। नदी की कटान की जद में आया पुराना पीपल का पेड़ फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन उसके चबूतरे में दरार पड़ गई है। अधिकारियों के अनुसार इससे पेड़ के गिरने की आशंका बनी हुई है।

गंडक नदी का डिस्चार्ज 88,300 क्यूसेक दर्ज

बाढ़ खंड के अधिकारियों ने बताया कि मुख्य तटबंध को फिलहाल किसी प्रकार का खतरा नहीं है। शनिवार सुबह आठ बजे बड़ी गंडक नदी का डिस्चार्ज 88,300 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार शाम चार बजे तक यह बढ़कर 1.14 लाख क्यूसेक हो गया था। भैंसहा गेज स्थल पर शाम के समय नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 12 सेंटीमीटर नीचे 94.88 मीटर दर्ज किया गया। 

स्पर-ए पर बचाव कार्य लगातार जारी

एसडीओ संजय कुमार गौड़ ने बताया कि स्पर-ए पर बचाव कार्य लगातार जारी है और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि मुख्य तटबंध को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। इस बीच एपी बांध के किलोमीटर 10.518 पर स्थित ठोकर के अपस्ट्रीम हिस्से में कटान का सिलसिला जारी है। दिन में कटान रोकने के लिए लगाए जा रहे जियो बैग रात में नदी की तेज धारा में धंस जा रहे हैं, जिससे पिछले चार दिनों से ठोकर पर खतरा बना हुआ है। कटान रोकने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अभियंताओं की टीम लगातार चौथे दिन भी मौके पर डटी रही। अधिकारियों के अनुसार नदी में अचानक बैकरोलिंग शुरू होने से ठोकर के लगभग 40 मीटर हिस्से पर कटान का खतरा उत्पन्न हो गया है। 

गन्ने की फसल भी कटान की चपेट

बांध के किनारे बोई गई गन्ने की फसल भी कटान की चपेट में आ रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्य नहीं कराया गया, जिससे बांध और ठोकरों की स्थिति कमजोर हो गई है। उनका कहना है कि यदि कटान रोकने के प्रभावी उपाय नहीं किए गए और नदी का डिस्चार्ज दोबारा बढ़ा तो ठोकर के साथ आसपास के गांवों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। 

बाढ़ से बचाव में जुटा प्रशासन 

बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव और जेई अमर श्रीवास्तव सहित अन्य अभियंता मौके पर मौजूद हैं। मिट्टी से भरे जियो बैग लगाकर कटान रोकने और खतरे को टालने का प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर घटने के बाद ठोकरों पर दबाव बढ़ा है। कटान रोकने के लिए बचाव कार्य लगातार जारी है तथा रात में भी तटबंधों की निगरानी की जा रही है। 

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