राखी के रंगों में सजी भारत की कला 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
On

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है, लेकिन इसकी खूबसूरती केवल भावनाओं तक सीमित नहीं। राखी अपने आप में भारतीय हस्तशिल्प, लोककला और कारीगरों की रचनात्मकता का भी सुंदर प्रतीक है। हर वर्ष बाजारों में राखियों के नए रंग, आकार और डिजाइन दिखाई देते हैं। रेशमी धागों से लेकर जरी, मोती, कुंदन, पत्थर और चांदी तक हर सामग्री राखी को एक अलग पहचान देती है। देश के अलग-अलग शहरों में तैयार होने वाली राखियों में वहां की स्थानीय कला और संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है। 

जयपुर की रंगीन कारीगरी- राजस्थान की समृद्ध शिल्प परंपरा जयपुर की राखियों में भी नजर आती है। यहां चटख रंगों, मोतियों, कुंदन और सजावटी पत्थरों से सजी राखियां तैयार की जाती हैं। पारंपरिक राजस्थानी रूपांकनों वाली राखियां अपनी भव्यता और आकर्षक रंग संयोजन के कारण विशेष पसंद की जाती हैं।

कोलकाता की जरी का आकर्षण- कोलकाता की राखियों में बंगाल की कलात्मक नफासत दिखाई देती है। रेशमी धागों, मोतियों और जरी के बारीक काम से तैयार राखियां बेहद सुंदर लगती हैं। सजावटी तत्वों का संतुलित इस्तेमाल इन्हें पारंपरिक होने के साथ आधुनिक रूप भी देता है।

लखनऊ की नजाकत- लखनऊ की पहचान उसकी बारीक कारीगरी और नफासत से है। यही अंदाज यहां की राखियों में भी दिखाई देता है। जरी, कढ़ाई, मोती और अन्य अलंकरणों से सजी राखियां नवाबी शहर की कलात्मक विरासत को दर्शाती हैं। पारंपरिक शिल्प के साथ आधुनिक डिजाइन का मेल इनकी खासियत है।

अहमदाबाद और वाराणसी की पहचान- गुजरात की रंगीन संस्कृति का प्रभाव अहमदाबाद की राखियों में स्पष्ट दिखाई देता है। गुजराती रूपांकनों और कढ़ाई से सजी राखियां यहां की खास पहचान हैं। चांदी और धातु से बनी राखियां भी आकर्षण का केंद्र रहती हैं। वहीं, वाराणसी अपनी सदियों पुरानी बुनाई और हथकरघा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। रेशमी धागों और पारंपरिक पैटर्न से सजी यहां की राखियों में बनारसी कला की झलक मिलती है। त्योहार से पहले इनका बाजार खासा सक्रिय हो जाता है।

सूरत और हैदराबाद की चमक- हीरा उद्योग के लिए मशहूर सूरत में राखियां भी बारीक और चमकदार अंदाज में तैयार की जाती हैं। मोती, शीशे, जरी और अन्य सजावटी सामग्री से बनी राखियां यहां की विशेषता हैं।

हैदराबाद के बाजारों में पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की राखियां मिलती हैं। मोतियों और रंगीन रत्नों से सजी राखियां शहर की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं। यहां की राखियों में परंपरा और बदलते फैशन का सुंदर मेल दिखाई देता है।

दिल्ली और मुंबई का आधुनिक अंदाज- दिल्ली के बाजारों में रक्षाबंधन से पहले राखियों की बड़ी विविधता देखने को मिलती है। पारंपरिक मौली, रुद्राक्ष और मोतियों वाली राखियों से लेकर बच्चों के लिए कार्टून और आधुनिक डिजाइन तक, यहां हर पसंद के विकल्प मिलते हैं। मुंबई में राखियों पर फैशन और आधुनिकता का प्रभाव नजर आता है। साधारण राखियों के साथ डिजाइनर और आकर्षक पैकेजिंग वाली राखियां भी बाजार में खूब दिखाई देती हैं।

एक धागे में समाई अनेक कलाएं- राखी का एक छोटा-सा धागा अपने भीतर भाई-बहन के रिश्ते के साथ अनेक कारीगरों की मेहनत भी समेटे होता है। धागे का चुनाव, रंगों का संयोजन, मोतियों और पत्थरों की सजावट तथा जरी-कढ़ाई-हर चरण में कारीगर का हुनर शामिल होता है। इस रक्षाबंधन जब हम राखी खरीदें, तो उसके डिजाइन के साथ उस कला को भी महत्व दें, जिसने एक साधारण धागे को प्रेम, परंपरा और सौंदर्य का प्रतीक बना दिया है। जयपुर की रंगीन कारीगरी से लेकर लखनऊ की नजाकत और वाराणसी की बुनाई तक, भारत की विविध कलाएं राखी के हर रूप में अपनी सुंदर छाप छोड़ती हैं।