भद्रा नहीं बनेगी बाधा, जानें राखी बांधने का सही समय

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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रक्षाबंधन सनातन परंपरा का वह पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं भाई बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में उनका साथ देने का संकल्प लेते हैं।

इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार त्योहार इसलिए भी खास है, क्योंकि इसी दिन वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है। हालांकि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में इसका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा और सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसलिए चंद्र ग्रहण को लेकर रक्षाबंधन के पर्व में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।

कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा तिथि?

द्रिक पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि को महत्व दिए जाने के कारण रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाना श्रेष्ठ माना गया है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय उत्तम माना गया है। इस दौरान बहनें विधि-विधान से भाई की आरती उतारकर उसके माथे पर तिलक लगा सकती हैं और फिर दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं।

भद्रा का नहीं रहेगा प्रभाव

रक्षाबंधन पर भद्रा काल को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाती है। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना गया है। इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए दिन में राखी बांधने के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।

राखी बांधते समय बोलें यह मंत्र

शास्त्रों में रक्षा सूत्र बांधते समय एक विशेष मंत्र के उच्चारण का विधान बताया गया है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए कह सकती है-

“येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चलः॥”

मान्यता है कि इस मंत्र के साथ बांधा गया रक्षा सूत्र भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प को मजबूत करता है। इस तरह रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों में स्नेह, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने की भावना को मजबूत करने वाला उत्सव है।