ADAS की सीमाएं, भारतीय सड़कों पर रखें ध्यान

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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आजकल कार खरीदते समय लोग इंजन और माइलेज के साथ सेफ्टी फीचर्स पर भी ध्यान देते हैं। ADAS यानी Advanced Driver Assistance System इसी आधुनिक तकनीक का हिस्सा है। यह ड्राइवर को सड़क पर संभावित खतरे पहचानने, लेन में बने रहने और जरूरत पड़ने पर ब्रेकिंग जैसी स्थितियों में मदद करता है। हालांकि भारतीय सड़कों की परिस्थितियां कई बार इसकी क्षमता की परीक्षा लेती हैं।

•लेन मार्किंग साफ न होने पर परेशानी

ADAS के कई फीचर्स कैमरे से सड़क की लेन पहचानते हैं।
भारत में कई जगह लेन मार्किंग घिसी या अस्पष्ट होती है।
ऐसी स्थिति में लेन डिपार्चर वार्निंग और लेन कीप असिस्ट सही तरीके से काम नहीं कर सकते।

•अचानक सामने आने वाली बाधाएं चुनौती

भारतीय सड़कों पर बाइक, ऑटो, साइकिल, पैदल यात्री और जानवर अचानक सामने आ सकते हैं।
ऐसे अनियमित ट्रैफिक पैटर्न को सिस्टम हर बार सही तरीके से समझ पाए, यह जरूरी नहीं।
ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग कभी-कभी जरूरत से पहले सक्रिय हो सकती है।

•बारिश और कोहरे में घट सकती है क्षमता

तेज बारिश, धुंध, धूल और कीचड़ से कैमरा या सेंसर प्रभावित हो सकते हैं।
विजिबिलिटी कम होने पर ADAS की सटीकता भी घट सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में ड्राइवर को सिस्टम के बजाय खुद सड़क पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

•सेंसर की सफाई जरूरी

ADAS के कैमरे और सेंसर पर धूल या मिट्टी जमने से सिस्टम प्रभावित हो सकता है।
नियमित सर्विसिंग और सेंसर की जांच जरूरी है। किसी खराबी या चेतावनी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• ADAS ड्राइवर का विकल्प नहीं

ADAS एक सहायता प्रणाली है, ऑटो-पायलट नहीं।
स्टीयरिंग पर नियंत्रण और सड़क पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
खराब मौसम, भीड़भाड़ और ग्रामीण सड़कों पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।