PM मोदी ने अपने भाषण में किया 'नाराज फूफा' का जिक्र, Gen-Z से सीधी बात में प्रधानमंत्री का विपक्ष पर वार

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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नई दिल्ली/लखनऊ, अमृत विचार :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में युवाओं (Gen-Z) से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश की मजबूत अर्थव्यवस्था का उल्लेख करने के साथ ही एक बेहद देसी और चुटीले अंदाज में विपक्षी आलोचकों पर तीखा तंज कसा। प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति से चिढ़े लोगों की तुलना शादियों में मुंह फुलाकर बैठने वाले 'नाराज फूफा' से कर दी।

दिल्ली मेट्रो में सफर कर एसआरसीसी पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पिछले 12 वर्ष के कार्यकाल में उनकी सरकार ने देश को 'नीतिगत पंगुता' की छवि से निकालकर दुनिया की सबसे तेजी से बढती हुई अर्थव्यवस्था बनाया है। दिल्ली मेट्रो में सफर कर एसआरसीसी पहुंचे पीएम मोदी ने 13 वर्ष पहले इसी कॉलेज में दिये गये अपने भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने उस समय के उनके भाषण के संकल्पों और सपनों को साकार करने की दिशा में कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा कि वह अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आये हैं। विपक्ष की आलोचनाओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा ," मैं आपके पास अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आया हूं। सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज टिक नहीं सकेगी।"

2013 के अपने भाषण को याद कर बोले पीएम मोदी

उन्होंने छात्रों को 2013 के अपने भाषण के बारे में कहा कि उस समय वह मुख्यमंत्री के साथ साथ वह विपक्षी पार्टी के नेता भी थे लेकिन उन्होंने सरकार की आलोचना के लिए इस मंच का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा मैंने उस समय कुछ संकल्पों का जिक्र किया था, एक विजन रखा, सकारात्मक बातें कहीं, वह मेरा संकल्प था। मैं उन बातों को जीता रहा। उस रास्ते पर चलता रहा। देश के लिए जीने का जज्बा और मेरे भीतर का भाव है वह 2013 का भाव शब्दों की माला में जुड़ता चला गया ।" 

PM मोदी ने छात्रों से कहा-''एक गिरोह जो मैं बोल रहा हूं उसके छोटे छोटे टुकड़े कर मेरे खाते में डाल देगी"

प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय उन्होंने पानी के गिलास का उदाहरण दिया था और कहा था कि इसे देखने के तीन नजरिये होते हैं एक आधा भरा , दूसरा आधा खाली तथा तीसरा पूरा भरा हुआ जिसमें आधा पानी और आधा हवा से भरा। मेरा तीसरा नजरिया है मैं गिलास को पूरा भरा देखता हूं। " उन्होंने कहा कि जब देश निराशा के दल- दल में फंसा था तो वह गिलास को आधा नहीं पूरा भरा हुआ देखते थे। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे 2013 के कालखंड के बारे में इंटरनेट पर जाकर देखें कि देश की स्थिति क्या थी। मीडिया में क्या हेडलाइन होती थी। उन्होंने कहा , ''एक गिरोह जो मैं बोल रहा हूं उसके छोटे छोटे टुकड़े कर मेरे खाते में डाल देगी" उन्होंने कहा कि 2013 में हेडलाइन क्या होती थी , 'एलओसी पर भारतीय सैनिकों की हत्या' आप सोचेंगे कि क्या कभी ऐसा भी होता था। अन्य हेडलाइन होती थी ' विश्व बैंक ने जीडीपी की दर का अनुमान घटाया' , 'महंगाई दर करीब दस प्रतिशत पर अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में' , हेलिकाप्टर खरीद में रिश्वतखोरी, और 'हैदराबाद में बम धमाके' । उस समय देश की क्या हालत थी 'ग्रोथ फर्श पर और महंगाई अर्श पर थी' भ्रष्टाचारी बेखोफ घूमते थे और हर तरफ 'नीतिगत पंगुता' की चर्चा थी। भारत को 'फ्रेजाइल फाइव' अर्थव्यवस्था में गिना जाता था । आतंकवादी हमले करते थे और देश में निराशा और हताशा के अलावा कुछ नहीं था। कहने का मतलब हर मोर्चे पर संघर्ष ही संघर्ष था। 

अपनी सरकार के उपलब्धियों का किया जिक्र

अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, " आज आतंकवाद फैलाने वाले त्रस्त पड़े हैं, पाकिस्तान में छिपे आतंकवादियों को भारत की सेना घर में घुसकर मारती हैं। जम्मू कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक शांति बढी है और माओवादी आतंक की कमर तोड़ दी गयी है। उन्होंने कहा कि दुनिया आज भारत के 'पॉलिसी डायनिज्म' की चर्चा कर रही है, तेजी से बढती अर्थव्यवस्था देख रही है । कई सकारात्मक खबरें आई है। देश का जोश बढा है, दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहा है और व्यापार की अड़चने हैं । इसके बावजूद भारत का सामर्थ्य उसके विकास की कहानी बता रहा है।

नहीं लिया किसी का नाम

उन्होंने कांग्रेस का नाम लिये बिना कहा कि देश को फेजाइल फाइव में धकेलने वाले लोगों को यह हजम नहीं हो रहा है । उन्होंने कहा कि अप्रैल के बाद से देश में बिजली उत्पादन बढा है, गाडियों की बिक्री बढी है और उपभोक्ता मांग भी बढ रही है, साथ ही वाणिज्यिक गतिविधि भी बढी है। उन्होंने कहा कि भारत बढ भी रहा है और रोजगार के नये अवसर भी बढा रहा है।

2013 से अब तक नहीं बदली विपक्ष की सोंच

उन्होंने आरोप लगाया कि आलोचना करने वालों का गिलास 2013 में भी आधा खाली था और उनकी सोच आज भी वैसी ही है उनके लिए गिलास खाली ही रहेगा। पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन में 'दिमागी नक्सल' के उल्लेख का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने होमियोपैथी की एक गोली दी थी जिसका असर यह हुआ कि नक्सली दिमाग के लोग सबके सामने आ गये और उनका पर्दाफाश हो गया। 

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