बरेली: जिले में 521 टीबी बाल रोगियों में 62 को संस्थाओं ने लिया गोद

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अमृत विचार, बरेली। जिले में टीबी से पीड़ित 521 बाल रोगियों में से 62अभी तक गोद लिए जा चुके हैं। इनमें से कुछ बाल रोगियोंका इलाज चल रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. केसी जोशी ने समाज सेवियों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से अपील की है कि वे टीबी के बाल …

अमृत विचार, बरेली। जिले में टीबी से पीड़ित 521 बाल रोगियों में से 62अभी तक गोद लिए जा चुके हैं। इनमें से कुछ बाल रोगियोंका इलाज चल रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. केसी जोशी ने समाज सेवियों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से अपील की है कि वे टीबी के बाल रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं और उनको स्वस्थ बनाने में मदद करें।

डा. जोशी ने कहा कि टीबी के बाल रोगी को गोद लेने का आशय दत्तक ग्रहण करने से बिल्कुल नहीं है। जिन बाल रोगियों को गोद लिया जाता है, उन्हें पोषक सामग्री देनी होती है और नियमित तौर पर उनका हालचाल लेना होता है। उन्हें पोषक तत्वों की आवश्यकता भी सबसे ज्यादा होती है।

इलाज के दौरान मनोबल बढ़ाने और पोषकता का ध्यान रखने में गोद लेने की मुहिम कारगर साबित हो रही है। इसके लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पूरे प्रदेश में मुहिम चला रखी है। टीबी के बाल रोगियों को गोद लेने वालों को किसी प्रकार का आर्थिक प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। यह स्वेच्‍छा से दी गयी सेवा है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. कैलाश चंद्र जोशी ने बताया कि बच्चों से टीबी जीवाणु दूसरों में फैलने की आशंका कम होती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि बच्चों में टीबी के जीवाणु वयस्कों की तुलना में कम संक्रामक होते हैं। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में क्षय रोग बड़ी स्वास्थ्य समस्या है।

वयस्कों की तुलना में नवजात और शिशुओं में बीमारी ज्यादा घातक साबित हो सकती है। शिशु इस संक्रमण से जल्द प्रभावित होते हैं, जिसके पीछे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर और परिवार व रिश्तेदारों से नजदीकता का अधिक होना भी हो सकता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो एक से दूसरे को आसानी से हो सकती है। टीबी के मामले सबसे ज्यादा 5 वर्ष से कम उम्र के शिशुओं में और10 वर्ष से अधिक उम्र के किशोरों में देखे जाते हैं।

जिले में हो रहा खास कार्य

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.कैलाश चन्द्र जोशी ने बताया कि 17 साल से छोटे बच्चों में 2020 में 1176 का टीबी का इलाज शुरू किया। 2021 में अब तक 521 बच्चों को खोज कर इलाज शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने टीबी से ग्रसित बच्चों को गोद लेने की मुहिम शुरू की थी जिसमें अब तक विभिन्न संस्थाओं द्वारा 62 बच्चों को गोद लिया जा चुका है। इस योजना में टीबी ग्रसित बच्चे के परिवार वालों का सहमति पत्र लेकर रोहिलखंड यूनिवर्सिटी की एक विशेष साइट पर डाटा अपलोड किया जाता है, जहां से कोई भी संभ्रांत व्यक्ति बच्चों को गोद ले सकता है जिसमें वह उनकी खानपान का खर्चा देखते हैं।

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