कोरोना को है हराना: समाजसेवी पलक ने दृढ़ विश्वास से जीती कोरोना से जंग
हल्द्वानी, अमृत विचार। जंग चाहे कितनी लंबी क्यों न चले, दुश्मन चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो। अगर धैर्य, संयम व साहस के हथियार के साथ लड़ने का जज्बा हो तो हर जंग जीती जा सकती है। इस बात को सही साबित किया है 31 वर्षीय पलक ठाकुर ने, जो अपनी इच्छाशक्ति के सहारे …
हल्द्वानी, अमृत विचार। जंग चाहे कितनी लंबी क्यों न चले, दुश्मन चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो। अगर धैर्य, संयम व साहस के हथियार के साथ लड़ने का जज्बा हो तो हर जंग जीती जा सकती है। इस बात को सही साबित किया है 31 वर्षीय पलक ठाकुर ने, जो अपनी इच्छाशक्ति के सहारे कोरोना को मात देकर युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई हैं।
पलक हल्द्वानी के सुभाष नगर की रहने वाली हैं। वह राजनीति में सक्रिय होने के साथ ही समाज सेवी भी हैं। पलक ने संक्रमित होने के बाद भी धैर्य नहीं खोया, तबियत बिगड़ने से मुश्किलें पैदा हुईं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति से वह डटी रहीं। होम आइसोलेशन में रहकर डॉक्टरों द्वारा बताई हर बात का कड़ाई से पालन किया, फिर क्या था संयम व अनुशासन के आगे आखिरकार कोरोना को नतमस्तक होना पड़ा। पलक को कोरोना के लक्षण दिखने पर उन्होंने अपना टेस्ट कराया, बीती 25 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई और वह घर पर ही आइसोलेट रहीं।
संयुक्त परिवार में रहते हुए भी वह अपनों से दूर रहीं, लेकिन परिजनों ने उन्हें मानसिक रूप से हर तरह से साहस दिया। उनके घर पर सास, जेठ, जेठानी, उनके बच्चे, पति और उनकी बेटी हैं।
आइसोलेशन के दौरान उन्होंने संयमित दिनचर्या, पौष्टिक आहार के साथ योग-प्राणायाम का भी सहारा लिया। चार टाइम नियमित रूप से भाप ली। जिसने उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई। ठीक होकर वह अन्य जरूरतमंदों की मदद कर रही हैं। साथ ही अन्य संक्रमितों को भी कोरोना से लड़ने की प्रेरणा देकर उनका लगातार मनोबल बढ़ा रही हैं।
कोरोना से अपनी जंग की कहानी बताते हुए पलक ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मक बने रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। अपने ऊपर निराशा व हताशा को हावी न होने दें, यही जीत का मंत्र है।
