हल्द्वानी का आपदा प्रबंधन कार्यालय खुद ही आपदा ग्रस्त…

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

हल्द्वानी, अमृत विचार। प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है, लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है। जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का …

हल्द्वानी, अमृत विचार। प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है, लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है। जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का सहयोग मिले, लेकिन जब खुद आपदा प्रबंधन ही आपदा ग्रस्त स्थिति में हो तो क्या कहा जा सकता है। सुनकर हैरानी होगी, लेकिन यह सच है कि हल्द्वानी तहसील में मौजूद आपदा प्रबंधन कार्यालय की स्थिति इतनी बेहाल है कि वहां तैनात कर्मचारियों का जीना दुश्वार हो गया है।

हल्द्वानी तहसील स्थित आपदा प्रबंधन का कार्यालय खुद ही आपदा ग्रस्त है। जो कर्मचारी सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकंप, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि, टिड्डी दल और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के लिए फ्रंटवर्कर के तौर पर काम कर रहे हैं। वही आज असुविधाओं में काम करने को मजबूर हैं। आपदा प्रबंधन का पहला चरण है खतरों की पहचान। इस अवस्था पर प्रकृति की जानकारी और किसी विशिष्ट अवस्थल की विशेषताओं से संबंधित खतरे की सीमा को जानना होता है।

साथ ही इसमें जोखिम के आंकलन से प्राप्त विशिष्ट भौतिक खतरों की प्रकृति की सूचना भी समाविष्ट है। इसके अतिरिक्त बढ़ती आबादी के प्रभाव क्षेत्र और ऐसे खतरों से जुड़े माहौल से संबंधित सूचना और डाटा भी आपदा प्रबंधन का अंग है, लेकिन तहसील स्थित आपदा प्रबंधन का कार्यालय इतनी बेहाल अवस्था में है कि यहां तैनात कर्मचारियों के लिए आम सुविधाएं भी मौजूद नहीं है। यहां आने वाले कर्मचारी को न तो पीने के लिए पानी की सुविधा है और न ही शौचालय की व्यवस्था की गई है। महिला कर्मचारियों का कहना है कि वह यहां सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैठती हैं। लेकिन इस बीच उन्हें शौचालय जाने के लिए भी कई बार सोचना पड़ता है, क्योंकि नामौजूदगी में ऊपरी स्तर पर कार्यवाही हो जाती है लेकिन सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जाती हैं।

तहसीलदार नितेश डागर का कहना है कि कोविड के कारण तहसील में कमरों की कमी हो गई है। जिस कारण आपदा प्रबंधन कार्यालय में कोविड शवों के लिए इस्तेमाल होने वाले बॉडी किट व अन्य सामान को वहां रखा गया है। उन्होंने कहा कि वह कार्यालय का निरीक्षण कर जल्द इस संबंध में कार्यवाही करेंगी।

संबंधित समाचार