बरेली: गन्ना किसानों का 187 करोड़ का भुगतान कराने में अफसर फेल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। गन्ना किसानों को 14 दिनों में भुगतान का दावा झूठा साबित हो रहा है। यह आलम तब है जब मिलों को बंद हुए तीन माह से अधिक का समय बीत चुका है। बावजूद तीन मिलों पर अब भी 187 करोड़ का भुगतान बकाया है। जबकि, गन्ना पेराई का नया सत्र इसी महीने …

बरेली, अमृत विचार। गन्ना किसानों को 14 दिनों में भुगतान का दावा झूठा साबित हो रहा है। यह आलम तब है जब मिलों को बंद हुए तीन माह से अधिक का समय बीत चुका है। बावजूद तीन मिलों पर अब भी 187 करोड़ का भुगतान बकाया है। जबकि, गन्ना पेराई का नया सत्र इसी महीने के आखिरी सप्ताह में शुरू होने वाला है। अफसर इसकी तैयारियों में व्यस्त हैं।

डीसीओ पीएन सिंह का कहना है कि बकाया भुगतान को लेकर फरीदपुर और मीरगंज की चीनी मिले प्रबंधकों को छोड़कर बाकी सभी को नोटिस जारी कर तत्काल भुगतान कराने के निर्देश दिए हैं। जबकि, मिल प्रबंधन चीनी की बिक्री के बाद ही गन्ना भुगतान की बात कह रही हैं।

सबसे फिसड्डी साबित हो रही सेमीखेड़ा मिल
भुगतान के मामले में सबसे फिसड्डी सेमीखेड़ा की सहकारी चीनी मिल साबित हो रही है जिसने पिछले करीब दस दिन में किसानों को कोई बकाया भुगतान नहीं दिया। फरीदपुर की द्वारिकेश और मीरगंज की धामपुर चीनी मिल शत-प्रतिशत भुगतान पहले ही कर चुकी हैं। जबकि नवाबगंज की ओसवाल मिल ने 55 करोड़ और बहेड़ी की केसर चीनी मिल ने 55 लाख का भुगतान हाल ही में किया है।

किसने कितना किया भुगतान

  • मिल -शेष(करोड़ में)-प्रतिशत
  • फरीदपुर-00-100
  • बहेड़ी-11199.84-69.67
  • नवाबगंज-3868.17-72.29
  • सेमीखेड़ा-3645.33-63.87

गन्ना किसानों को 14 दिनों में भुगतान का दावा झूठा है। भुगतान रुकने की वजह से कोई व्यवसाय भी नहीं कर पा रहे हैं। भुगतान मिल जाता तो सहूलियत हो जाती। -तिलक सिंह, त्रिकुनिया

गन्ने का बकाया भुगतान नहीं होने से काफी दिक्कत होती हैं। अभी 40 फीसदी भुगतान रुका होने से नई फसल की पैदावार में दिक्कत आएगी। दोबारा नई फसल करने का मन भी नहीं होता। -बेचेलाल, बिथरीचैनपुर

संबंधित समाचार