हल्द्वानी: धड़ल्ले से बिक रहे बिना आईडी प्री-एक्टिवेटेड सिम, कीमत सिर्फ सौ रुपये

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भूपेश कन्नौजिया, अमृत विचार, हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में धड़ल्ले से इन दिनों प्री-एक्टीवेट सिम खपाए जा रहे हैं। किसी भी कंपनी का सिम सौ रुपये में आसानी से खुलेआम फेरी लगाकर बेचा जा रहा है। आंखों देखा यह वाकया मंगलवार का है जहां दो युवक कंधे पर बैग लटकाए एमबीपीजी कॉलेज के …

भूपेश कन्नौजिया, अमृत विचार, हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में धड़ल्ले से इन दिनों प्री-एक्टीवेट सिम खपाए जा रहे हैं। किसी भी कंपनी का सिम सौ रुपये में आसानी से खुलेआम फेरी लगाकर बेचा जा रहा है। आंखों देखा यह वाकया मंगलवार का है जहां दो युवक कंधे पर बैग लटकाए एमबीपीजी कॉलेज के छात्रों से नंबर खरीदने की बात करते नजर आए। दोनों युवक निजी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के सिम केवल सौ रुपये में देने की बात कह रहे थे। जब उनसे उस नंबर की केवाईसी कराने के बारे में पूछा गया तो वो मुकर गए। कहने लगे इसका कोई फायदा नहीं आप को एक्टीवेट सिम दिया जाएगा। उनकी इस बात की रिकार्डिंग हो रही है वह इस बात से अंजान थे और नंबर खरीदने की गुजारिश करने लगे।

युवकों से जब यह पूछा गया कि पहले से नंबर कैसे एक्टीवेट हैं तो वह बहाने बना वहां से निकल गए। अब सवाल यह है कि आखिर जब ट्राइ (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) द्वारा प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचे जाने में मनाही है तो कंपनी भला बिना केवाईसी के नंबर एक्टीवेट कैसे कर सकती हैं। मामले को गंभीरता से देखा जाए तो विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, बडे़ नेताओं की रैलियां होनी हैं। पहले से ही साइबर क्राइम की घटनाएं सामने आ रही हैं। इधर, कोई भी मोबाइल सेवा कंपनी तब तक सिम एक्टीवेट नहीं करती जब तक डिजिटल तरीके से उसकी केवाईसी नहीं हो जाती। ऐसे में सवाल उठता है कि इन नंबरों को किन लोगों की आईडी पर एक्टीवेट किया गया। क्या कंपनी के प्रतिनिधि ही खुद मुनाफा कमाने के चक्कर में तो यह नहीं कर रहे। बहरहाल इस बात की जानकारी पुलिस को जुटानी होगी नहीं तो ये सिम कानून व्यवस्था के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

यह हैं मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के नियम
उपभोक्ताओं को मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए अलग से यूनीक पोर्टिंग कोड (यूपीसी) जेनरेट करना होता है। वहीं, मौजूदा सर्कल के यूजर्स का नंबर तीन दिन में और दूसरे सर्कल में नंबर पोर्ट कराने में पूरे पांच दिनों का समय लगता है। सिम एक्टीवेशन के लिए केवाईसी की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होती है यानी अब कोई भी डॉक्यूमेंट जमा नहीं करना होता और न ही कोई फॉर्म भरना होता है। नए नियमों के अनुसार एक व्यक्ति अधिकतम 12 सिम ले सकता है। नौ सिम का इस्तेमाल मोबाइल कॉलिंग के लिए कर सकता है, इन नौ सिम का इस्तेमाल मशीन-टू-मशीन कम्यूनिकेशन के लिए ही किया जा सकता है।

नंबर पोर्ट कराने के लिए किसी झांसे में न आएं
अगर आप अपने मौजूदा मोबाइल सर्विस से खुश नहीं हैं और दूसरे ऑपरेटर पर शिफ्ट होना चाहते हैं तो आपको अपने मोबाइल से बड़े अंग्रेजी अक्षरों में पोर्ट लिख कर 1900 पर संदेश भेजना होगा। इसके बाद आपको एक यूनिक पोर्टिंग कोड मिलेगा। फिर मनचाहे मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी के अधिकृत कार्यालय पर जाना होगा जहां कंपनी का प्रतिनिधि आपके यूपीसी कोड से नई रिक्वेस्ट जनरेट करेगा और तीन दिन के भीतर आपका वही नंबर आपके दूसरे मोबाइल ऑपरेटर पर शिफ्ट हो जाएगा।

मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसे प्री-एक्टीवेट सिम बेचे जा रहे हैं तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। इस तरह से सिम बेचना अपराध है। यदि कोई इस तरह से सिम बेचता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

– भूपेंद्र सिंह धोनी, सीओ सिटी

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