हरदोई में स्थापित है माता श्रवण देवी शक्तिपीठ
हरदोई, अमृत विचार। माता श्रवण देवी का मंदिर जिले की एक पौराणिक धर्मस्थल है। यहां पर नवरात्र में माता की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्र में मानी गई मनोकामना माता अवश्य पूर्ण करती हैं। इस शक्तिपीठ का उल्लेख देवी भागवत में भी किया गया है। बताते चलें नगर में सांडी चुंगी के निकट माता …
हरदोई, अमृत विचार। माता श्रवण देवी का मंदिर जिले की एक पौराणिक धर्मस्थल है। यहां पर नवरात्र में माता की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्र में मानी गई मनोकामना माता अवश्य पूर्ण करती हैं। इस शक्तिपीठ का उल्लेख देवी भागवत में भी किया गया है।
बताते चलें नगर में सांडी चुंगी के निकट माता श्रवण देवी का मंदिर है। पूरे नवरात्र यहां पर उत्सव का माहौल रहता है।
नवरात्र में भक्तों द्वारा विशेष पूजा अर्चना की जाती है । मंदिर के पुजारी रामविलास ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों व प्रचलित कथा के अनुसार जब राजा दक्ष ने यज्ञ के दौरान शिव का अपमान किया था। तब माता पार्वती अग्नि कुंड में कूद कर सती हो गई थी। उनके नश्वर शरीर को लेकर भगवान शिव क्रोध में तांडव करने लगे ।इस बात से सभी देवी देवता भयभीत हो गए। देवी देवताओं ने विष्णु से आग्रह किया था विष्णु ने अपने चक्र से माता के नश्वर शरीर के टुकड़े कर दिए ।जहां जहां पर माता के अंग गिरे वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना हो गई। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में या शक्तिपीठ स्थापित हैं। हरदोई के इस स्थान पर भी माता का कान गिरा था ।श्रवण अंग गिरने के कारण इस स्थान का नाम श्रवण देवी पड़ गया।
जिले में माता श्रवण देवी का विशेष स्थान है। प्रतिवर्ष यहां शतचंडी यज्ञ का आयोजन होता है । नवरात्रि पर मेले का आयोजन होता है पूरे नवरात्रि यहां पर विशेष पूजन अर्चन होता है। नगर के अधिकांश मांगलिक कार्यों का शुभारंभ माता श्रवण देवी की पूजन के बाद होता है। इस शक्तिपीठ के दर्शन के लिए लोग जिले से ही नहीं बल्कि आसपास जिलों से भी आते हैं।
प्रतिवर्ष यहां आषाढ पूर्णिमा व नवरात्र पर मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पर प्रतिवर्ष होने वाले शतचंडी यज्ञ में देशभर के प्रकांड विद्वान ज्ञान गंगा से भक्तों को सिंचित करते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन शतचंडी यज्ञ का समापन होने पर बटने वाले विशेष प्रसाद ( खीर ) का लोग पूरे वर्ष इंतजार करते हैं। माता शरण देवी में मनोकामना मांगने के लिए लोग जिले से ही नहीं बल्कि दूर-दराज के जिलों से भी आते हैं।
तत्कालीन जिलाधिकारी पुलकित खरे द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया ।मंदिर के चारों ओर बाउंड्री बनवाने के साथ ही मंदिर के इतिहास का भी शिलापटो पर उल्लेख किया गया। उनके द्वारा इस पौराणिक स्थल को दर्शनीय स्थल के रूप में भी विकसित किया गया।
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