हल्द्वानी: कर्ज चुकाने के लिए वेल्डर ने मार डाली पुलिस वाले की पत्नी
हल्द्वानी, अमृत विचार। तमाम कयासों के बाद आखिरकार ममता के कत्ल की गुत्थी सुलझ गई। भरी दोपहर कत्ल और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले कातिल को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। कातिल ममता को पहले से पहचानता था और कर्ज के बोझ तले दबा था। इस कर्ज को उतारने के …
हल्द्वानी, अमृत विचार। तमाम कयासों के बाद आखिरकार ममता के कत्ल की गुत्थी सुलझ गई। भरी दोपहर कत्ल और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले कातिल को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। कातिल ममता को पहले से पहचानता था और कर्ज के बोझ तले दबा था। इस कर्ज को उतारने के लिए कातिल ने लूट की योजना बनाई और जब योजना पर पानी फिरता दिखाई दिया तो हथौड़ी के कई वार से ममता को मौत के घाट उतार दिया।
पुलिस बहुउद्देशीय भवन में मामले का खुलासा करते हुए डीआईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि बीती तीन नवंबर की दोपहर इमली धड़ा कालिका कालोनी लोहरियासाल तल्ला मुखानी निवासी कांस्टेबल शंकर सिंह बिष्ट की पत्नी ममता बिष्ट की हत्या कर दी गई। खुलासे के लिए चार टीमें लगाई गईं और एक हजार से ज्यादा सीसीटीवी खंगाले गए।
जिसके बाद स्प्लैंडर बाइक की तस्दीक हुई और सीसीटीवी के सहारे पुलिस हत्यारोपी अशरफ उर्फ भूरा पुत्र अब्दुल नवी निवासी नई बस्ती किच्छा ऊधमसिंहनगर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी अशरफ ने बताया कि वह पेशे से वेल्डर है और बीते दो साल में वह तीन बार सिपाही शंकर के घर में ग्रिल लगाने का काम कर चुका है और इसी वजह से ममता उसे अच्छे से पहचानती थी।
अशरफ आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। ढाई लाख से ज्यादा का कर्ज हो चुका था और 35 हजार रुपए मासिक की दुकान का पिछले छह माह से किराया भी अदा नहीं कर पाया था। ऐसे में उसने सिपाही शंकर के घर लूट की योजना बनाई।
तीन नवंबर को वह अपनी स्प्लैंडर बाइक से शंकर के घर पहुंचा और ममता से कहा, उसने छत पर जो ग्रिल लगाई है, उसकी बाजार में बहुत डिमांड है। वह ग्रिल की फोटो खींचना चाहता था। ममता ने इसकी इजाजत दे दी, लेकिन उसे अकेले छत तक नहीं जाने दिया। ग्रिल की फोटो लेने के बाद अशरफ वापस जा रहा था और तभी जान-पहचान की वजह से ममता ने अशरफ से पानी के लिए पूछ लिया। तभी अशरफ ने कत्ल का इरादा कर लिया। जैसे ही ममता किचेन में पहुंची, अशरफ ने पीछे से उस पर हथौड़ी से एक के बाद एक पांच वार कर दिए। कत्ल के बाद घबराए अशरफ के हाथ जो लगा उसे जेब में भरा और फरार हो गया।
इनामों की बौछार, डीजीपी ने दिए एक लाख रुपए
हल्द्वानी। खुलासा करने वाली टीम पर इनामों की बौछार हो गई। मामले में डीजीपी अशोक कुमार ने एक लाख रुपए इनाम की घोषणा की। जिसके बाद डीआईजी नीलेश आनंद भरणे ने 50 हजार, एसएसपी पंकज भट्ट ने 25 हजार रुपए पुरस्कार की घोषणा की। जबकि कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत ने 21 और मेयर जोगेंद्र रौतेला ने 11 हजार रुपए इनाम की घोषणा की।
लूटा और मुथुट फाइनेंस में गिरवी रख दिए टॉप्स
हल्द्वानी। वारदात को अंजाम देने पहुंचे अशरफ ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। पहले तो अशरफ ने हर वक्त अपने चेहरे को हेलमेट से ढक कर रखा और वारदात के बाद उसने अपनी बाइक का हुलिया भी बदल डाला। खून से सने कपड़े घर पहुंचते ही धो दिए, लेकिन खून के दाग पूरी तरह साफ नहीं हो सके। इसके बाद अशरफ ने लूटे गए जेवरों में से ममता के कान के टॉप्स को किच्छा में चौपड़ा मार्केट के सामने स्थित मुथुट फाइनेंस में 38 हजार रुपए में गिरवी रख दिए। जिसकी रसीद भी पुलिस ने बरामद कर ली है।
टेबल फैन में लूट का माल, गन्ने के खेल में आलाकत्ल
हल्द्वानी। सीसीटीवी के जरिये अशरफ का पीछा करती पुलिस उसकी गली और फिर घर तक पहुंच गई। अशरफ को अंदाजा नहीं था कि वह पकड़ा जाएगा। पुलिस ने उसके घर से धुले गए खून से सने कपड़े, स्प्लैंडर बाइक बरामद कर ली। सख्ती पर अशरफ ने लूटा गया माल भी घर से ही बरामद करा दिया। इस माल को उसने टेबल फैन के अंदर छिपा कर रखा था। जबकि अशरफ की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया आलाकत्ल (हथौड़ी) भी पुलिस ने पंचायतघर स्थित धनपुरी क्षेत्र में स्थित गन्ने के खेत से बरामद कर लिया।
22 लोगों की टीम ने चार दिन में किया खुलासा
हल्द्वानी। घटना के खुलासे के लिए तीन टीमों (22 लोगों) का गठन किया। 22 लोगों की तीन टीमों ने चार दिन में घटना का खुलासा कर दिया। सीओ ऑपरेशन के नेतृत्व वाली पहली टीम में एसओजी प्रभारी राजवीर सिंह नेगी, एसआई अनिल कुमार, एसआई सोमेन्द्र सिंह, एसआई रविन्द्र राणा, एसआई दिनेश जोशी, एसआई दिलीप कुमार, का. एहसान अली, चन्दन नेगी, भानु प्रताप, कुन्दन कठायत, त्रिलोक रौतेला, आशोक रावत, दिनेश नगरकोटी और इसरारनबी थे। सीओ सिटी भूपेन्द्र सिंह धौनी के नेतृत्व वाली दूसरी टीम में साइबर सेल प्रभारी संजय कुमार, कोतवाल हरेन्द्र चौधरी, एसआई कमित जोशी, का. अनिल गिरी, घनश्याम रौतेला, बंशीधर जोशी और तीसरी टीम में मुखानी थानाध्यक्ष रमेश बोरा, एसआई प्रीती और एसआई बबीता थीं।
पहले तोड़ा, फिर लॉकर को चाबी से खोला
हल्द्वानी। क्राइम सीन को देख कर हर पुलिस अधिकारी का यही मानना था कि ये एक सुनियोजित हत्या है, जिसे लूट का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची तो लॉकर में चाबी लगी थी और उस पर हथौड़ी के निशान थे। जेवर बिस्तर पर फैले थे और कुछ जेवर गायब थे। इसी तरह कातिल घर में मौजूद पूरा कैश भी नहीं ले गया। फिर ममता को कातिल के लिए पानी निकालना और आरओ का खुला रह जाने जैसे तथ्य ने इसे सुनियोजित हत्या मानने पर विवश कर दिया, लेकिन सीसीटीवी की पड़ताल हुई और जब अशरफ हाथ लगा तो कहानी बदल गई। दरअसल, ममता का कत्ल करने के बाद अशरफ ने लॉकर पर हथौड़ी चलाई और लॉकर नहीं टूटा। तलाश में उसे चाबी मिल गई, जिसे वो लॉकर में लगाकर छोड़ गया था।
