चमोली: जोशीमठ में भू-धंसाव से राहत के लिए पुरज़ोर प्रयतन
नयी दिल्ली/चमोली, अमृत विचार। जोशीमठ में लैंड स्लाइड से प्रभावित लोगों की मदद के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को बताया कि क्षेत्र में धंसने के कारण कई घरों में गहरी दरारें आ गई हैं।
राज्य सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ के 863 घरों में गहरी दरारें आ गई हैं। राज्य सरकार ने इन घरों से 296 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने उनके पुनर्वास में मदद के लिए उन्हें धन भी दिया है। 30 जनवरी तक प्रभावित 235 परिवारों को साढ़े तीन करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।
सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की है। प्रत्येक परिवार को भोजन और आवास के लिए प्रतिदिन 950 रुपये और आकस्मिक व्यय के लिए प्रति व्यक्ति 450 रुपये दिए जाएंगे। सरकार अस्थायी आवास का लाभ नहीं लेने वाले परिवारों को छह महीने के लिए 5,000 रुपये प्रति माह की सहायता प्रदान करेगी। सरकार ने राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को मुफ्त चिकित्सा उपचार और आपूर्ति भी प्रदान की है।
उत्तराखंड सरकार ने हैदराबाद में राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI), कोलकाता में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GIS), देहरादून में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG), राष्ट्रीय संस्थान सहित कई शोध संस्थानों की स्थापना की है। एनआईएच रुड़की में जल विज्ञान विभाग (एनआईएचजी), केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) फरीदाबाद में, रुड़की में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), देहरादून में भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) और रुड़की में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई)।
प्रत्येक संस्थान को एक विशिष्ट कार्य और जिम्मेदारी सौंपी गई है।सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) भी उन्हें तकनीकी परामर्श प्रदान कर रहा है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों को स्थिति तथा इसकी वजह से होने वाले नुकसान का आकलन करने, इसके कारकों और सहायक कारणों का अध्ययन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
