43 साल की सड़क: हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल, जानिए पूरा मामला

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सड़क के लिए अधिग्रहीत भूमि का वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से क्षतिपूर्ति देने का मामला

बरेली, अमृत विचार। नवाबगंज के नकटी नारायणपुर गांव में करीब 43 साल पहले दो किसानों की भूमि पर सड़क बनाकर क्षतिपूर्ति नहीं देने का प्रकरण अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सवा दो बीघा से अधिक भूमि पर सड़क बनाने के मामले में कुछ दिन पहले ही वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार क्षतिपूर्ति देने के हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे। इस आदेश को जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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जिला प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख नियत की है।

अफसरों ने बताया कि यदि इस तरह के मामले में क्षतिपूर्ति देने का सिलसिला शुरू हो गया तो सैकड़ों लोग खड़े हो जाएंगे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई है। इस मामले में बरेली से लेकर लखनऊ तक के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चक्कर लगाए हैं।

अभी पांच दिन तक अपर जिलाधिकारी न्यायिक आशीष कुमार इलाहाबाद रहकर आए हैं। 4 अप्रैल को मामले में सुनवाई थी। नवाबगंज तहसील के भदपुरा ब्लाॅक के गांव नकटी नारायणपुर में लोक निर्माण विभाग ने 1980 में ओमपाल और बृजपाल के खेत में करीब सवा दो बीघा से अधिक भूमि पर सड़क बनाई थी।

उस सड़क में गई भूमि का मुआवजा न मिलने का आरोप लगाते हुए ओमपाल व अन्य ने मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार मुआवजे की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई कर हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के अफसरों से रिपोर्ट तलब की थी लेकिन लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने मामले में रूचि नहीं ली।

हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई और डीएम, एडीएम फाइनेंस समेत कई अफसरों को तलब करते हुए कमेटी गठित कर विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। मामले में एडीएम सिटी की अध्यक्षता में एडीएम न्यायिक, एडीएम फाइनेंस और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच कराई थी। उस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में प्रस्तुत भी किया। 13 मार्च को हुई तारीख पर एडीएम सिटी डा. आरडी पांडेय और एडीएम फाइनेंस संतोष बहादुर सिंह ने पेश होकर कागजात प्रस्तुत किए थे।

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