लखनऊ : विश्व मलेरिया दिवस कल, 2200 बच्चों को किया जायेगा जागरुक

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लखनऊ, अमृत विचार। हर साल किसी न किसी थीम के साथ 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है । इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज अग्रवाल ने बताया कि पहली बार यह दिवस साल 2008 में मनाया गया था । इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक करना है | इस साल विश्व मलेरिया दिवस की थीम है टाइम टू डिलीवर जीरो मलेरिया:इन्वेस्ट, इनोवेट एंड इम्प्लीमेंट।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बारिश शुरू होने के साथ ही वेक्टर संक्रमण काल शुरू हो जाता है । अधिक बारिश के कारण अत्यधिक जलभराव होने से मच्छरों का प्रजनन होता है । संक्रमित वयस्क मादा मच्छर के काटने से मलेरिया व अन्य वेक्टर जनित रोग फैलते हैं । मलेरिया मादा ऐनाफिलीज मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है । यह मच्छर साफ पानी में पनपता है । सावधानी बरतकर मलेरिया से पूरी तरह से बचाव जा सकता है। 

कुछ लोग इस बीमारी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं । पाँच साल तक की आयु के बच्चे, गर्भवती, और एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है । इसके अलावा प्रवासी लोग जिनमें मलेरिया के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और वह मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रहने जाते  हैं ।

यह वेक्टर जनित बीमारी है । वेक्टर के संचरण को नियंत्रित करना ही इस बीमारी से बचाव का मुख्य उपाय है ।  मच्छरोधी रसायन का छिड़काव, साफ-सफाई, घरों में खिड़की और दरवाजों पर जाली का प्रयोग, सोते समय मच्छरदानी, मच्छररोधी क्रीम या अगरबत्ती का प्रयोग और पूरी बांह के कपड़े पह मच्छर के काटने से बचा जा सकता है । साल 2030 तक देश को  इस बीमारी से मुक्त कर करने का लक्ष्य है ।

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर कानपुर रोड स्थित एक निजी स्कूल में लगभग 2200 विद्यार्थियों को मलेरिया के लक्षण, बचाव के बारे में संवेदीकृत किया जाएगा । इसके साथ ही जनपद सहित सभी ब्लॉक में जागरूकता गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा ।

जिला मलेरिया अधिकारी ने  कहा कि मलेरिया के लक्षणों के बारे में लोगों को जानना बहुत जरूरी है ताकि समय से उपचार हो सके । मलेरिया में सर्दी और कंपन के साथ एक-दो दिन छोड़कर तेज बुखार आता है। इसके साथ ही उल्टियाँ और शरीर में तेज दर्द रहता है । बुखार आते समय पसीना आता है और बुखार उतरने के बाद थकावट और कमजोरी आती है । मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए छत तथा आँगन में पड़े पुराने बर्तन, कूलर आदि में पानी न इकट्ठा होने दें । घर के आस-पास कूड़ा न इकट्ठा होने दें। नंगे बदन न रहें, घर में यदि बुखार का रोगी है तो उसे बिना मच्छरदानी के न रहने दें अथवा ऐसे कमरे में रोगी को रखें जिसमें खिड़की तथा दरवाजे पर जालियाँ लगी हों । बुखार आने पर स्वयं कोई इलाज न करें पास के स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच और इलाज कराएं । रोगी बिना रक्त की जांच कराए दवा का इस्तेमाल न करें ।

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