प्रयागराज : कृष्ण जन्मभूमि विवाद में कार्यालय सर्वेक्षण और वैज्ञानिक आयोग के गठन की मांग वाली याचिका खारिज

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अमृत विचार, प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि शाही मस्जिद ईदगाह परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में ईदगाह परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के मामले पर निर्णय लेने के लिए मथुरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) को निर्देश देने की मांग की गई थी।

याची का तर्क था कि सिविल जज को भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और अन्य द्वारा दाखिल मुकदमे पर आपत्ति जताते हुए मस्जिद समिति और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के आवेदन पर सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के आधार पर निर्णय लेने से पहले उसके आवेदन पर निर्णय लेना चाहिए।

इस संबंध में न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की एकल पीठ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान अपनी विशेष टिप्पणी में कहा कि यह एक स्थापित कानून है कि जहां किसी मुकदमे में उसकी पोषणीयता पर सवाल उठाया जाता है तो वहां पहले इस बात का निर्णय करना होता है कि मुकदमा चलने योग्य है या नहीं।

इसके साथ ही सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत किसी आवेदन पर फैसला सुनाते समय अदालत द्वारा किसी अन्य तर्क या साक्ष्य पर विचार नहीं किया जा सकता है। मालूम हो कि याची ने पहले जनवरी 2023 में मथुरा सिविल जज के समक्ष अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के अनुरोध के साथ कृष्ण जन्मभूमि को उस स्थान पर पुनर्स्थापित करने की प्रार्थना की थी, जहां शाही ईदगाह मौजूद है। इस पर प्रतिवादी ने आपत्ति जताते हुए सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल किया था।

इसके अलावा याची ने कार्यालय सर्वेक्षण करने और एक वैज्ञानिक आयोग का गठन करने के लिए सीपीसी के आदेश 26 नियम 9 के तहत एक सक्षम प्राधिकारी के चयन के लिए एक और आवेदन दाखिल किया। जिला अदालत ने याची के उक्त आवेदन पर कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उपरोक्त मुकदमे की पोषणीयता पर ही प्रश्न उठने लगा था। जिला न्यायालय के दिनांक 31 मार्च 2023 के आदेश से व्यथित होकर याची ने संबंधित न्यायालय को निर्देश देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में वर्तमान याचिका दाखिल की।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने इस वर्ष मई माह में श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से संबंधित सभी मामलों को मथुरा न्यायालय से अपने पास स्थानांतरित कर लिया था, इसलिए याची की प्रार्थना सुनवाई योग्य नहीं है। आयोग के गठन के संबंध में सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत याचिका पर पारित जिला न्यायालय के आदेश को उचित पाया और इसीलिए वर्तमान याचिका खारिज कर दी।

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