पीलीभीत: खूंखार हो रहे कुत्ते..30 दिन में 2157 को लगी वैक्सीन

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कुत्तों के अलावा बिल्ली के 88 और बंदर काटने के 87 मामले आए

पीलीभीत, अमृत विचार। तराई के जनपद में कुत्ते खूंखार हो गए हैं। हर दिन 150 से 250 कुत्ते काटने के मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो 20 से 25 फीसदी इजाफा हो रहा है। इसमें अधिकतर बच्चे इनका शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में जनवरी माह में पालतू और आवारा कुत्तों के काटने के 2157 मामले सामने आए। जिनको एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। ताकि बिल्ली के 88 और बंदर के काटने से जुड़े 87 प्रकरण भी आए।

शहर की सड़कों पर कुत्तों के झुंड राहगीरों की मुसीबत बन चुके हैं। किधर भी निकल जाएं कुत्ते हमलावर हो रहे हैं। कई तो अचानक कुत्तों के दौड़ने के बाद बचाव को वाहन दौड़ाने पर गिरकर चोटिल हो जाते हैं। कुत्तों काटने के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने वालों के आंकड़े पर गौर करें तो नवंबर 2023 से लेकर जनवरी 2024 तक 6851 लोगों को कुत्ते, बिल्ली, बंदर  अपना शिकार बना चुके हैं। इसमें नवंबर माह में 2028, दिसंबर में 2448 और जनवरी 2024 में 2375 लोगों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए।

मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में ही 2157 लोग  कुत्तों के काटने से घायल हुए। इसमें 1540 को पालतू कुत्तों जबकि 617 आवार कुत्तों के काटने से घायल हुए थे। मेडिकल कॉलेज में हर दिन 150 से 250 मरीज एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। जिसमें इक्का-दुक्का छोड़ दे तो अधिकतर को कुत्ते ने ही काटा। 

खास बात यह है कि आवार कुत्तों के साथ पालतू कुत्ते अधिक हमलावर रहे। जो अपने मलिक और परिवार के सदस्यों को ही घायल कर रहे हैं। जिसका ग्राफ जनवरी माह में अधिक रहा। इनके अलावा  जनवरी में ही 88 लोगों को बिल्ली और 87 लोगों को बंदर ने काटा।  इधर, फरवरी में भी कुत्तों काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार आवार कुत्तों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चला रहे। जबकि बीते सालों में कई लोगों की जान भी कुत्ते हमला कर ले चुके हैं। 

वर्ष 2021 में खेत पर धनिया काटने गई  जहानाबाद क्षेत्र के गांव बगुवा निवासी 12 वर्षीय नेहा को कुत्तों के झुंडे ने हमला कर दिया था। उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद कुत्ते पकड़वाने की मांग हुई और तत्कालीन डीएम ने जिम्मेदारी तय की तो बरेली से कुत्ता पकड़ने के लिए टीम भी बुलवाई गई थी। मगर समय के साथ ही दोबारा जिम्मेदार बेपरवाह हो गए।

सीएचसी- पीएचसी पर नहीं टीकाकरण
कहने को तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज के अलावा सीएचसी -पीएचसी पर कुत्ते समेत अन्य जानवरों के काटने के मामले में मरीज को एंटी रैबीज इंजेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मगर काफी समय से सीएचसी पीएचसी पर ये सुविधा नहीं मिल पा रही। रम्पुरिया गांव के रहने वाले अमित कुमार ने बताया कि उन्हें कुत्ते ने काट लिया था। सीएचसी पर इंजेक्शन लगवाने के लिए गए तो बॉयल खुलने से इनकार कर दिया था। स्टाफ का तर्क था कि तीन लोग और हो। तभी बॉयल खुलेंगे। अन्यथा बॉयल खोलने पर खराब हो जाएगी। यहीं हाल सभी जगह पर बना है।

कुत्ते काटने के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। प्रतिदिन 150 से 200 लोग वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में वैक्सीन की उपलब्धता बनी हुई है। - डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज

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