हल्द्वानी: मुल्जिम बहनों को भूले भाई, बहनों ने निभाया फर्ज
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। भाई-बहन का अटूट रिश्ता जेल की चाहरदिवारी में दम तोड़ रहा है। बहनें तो बड़ी संख्या में जेल में बंद भाइयों की सूनी कलाई पर राखी बांधने पहुंची, लेकिन भाई अपनी मुल्जिम बहनों को भूल गए। हल्द्वानी उप कारागार में महिला बैरक में महिलाओं का दिन अपने भाइयों के इंतजार में बीत गया। हालांकि बहनों ने जेल के बाहर भी खूब इंतजार किया।
हल्द्वानी उप कारागार में आमतौर पर बंदियों और कैदियों की संख्या 1200 से 1800 से बीच होती है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। रक्षाबंधन के दिन जेल में बंदियों और कैदियों की कुल संख्या 1258 थी और इसमें 74 महिलाएं हैं। रक्षाबंधन पर जेल प्रशासन ने जेल में विशेष इंतजाम किए थे और इस विशेष दिन पर जेल में मिलाई करने की इजाजत सिर्फ महिलाओं को दी गई थी।
ताकि व्यवस्था बनी रही। बहनें सुबह से ही मिठाई, राखी व अन्य सामान लेकर अपनी बारी के इंतजार में खड़ी हो गईं। इससे जहां पुरुष कारागार में अलग उत्साह था तो इसके ठीक उलट महिला कारागार में सन्नाटा छाया था। दरअसल, बहनें तो जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं, लेकिन भाई महिला बैरक में बंद अपनी बहनों का हालचाल लेने भी नहीं पहुंचे। जेल प्रशासन के मुताबिक पूरे दिन में जहां 300 से अधिक बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, वहीं सिर्फ पांच पुरुष (भाई) ही अपनी बहनों से राखी बंधवाने पहुंचे।
चार भाई-बहनों ने जेल के अंदर ही मनाया पर्व
इंतजार जेल के बाहर भी था और अंदर भी। अंदर बंद महिलाएं अपने भाइयों का और भाई अपनी बहनों का कर रहे थे। जबकि जेल के भीतर ही चार भाई-बहन मुलाकात को बेचैन थे। अलग-अलग मामलों में बंद इन भाई बहनों तो तब तक इंतजार करना पड़ा, जब तक मिलाई करने आए लोगों की पहली खेप खत्म नहीं हो गई। इसके बाद जेल के भीतर ही चारों भाई-बहनों की मुलाकात कराई गई। बहनों ने विधिवत भाई को तिलक कराया, मुंह मीठा कराया और राखी बांधी।
जेल के गुलाब जामुन, छेना और बर्फी से कराया मुंह मीठा
जेल प्रशासन जेल रसोईं को लेकर कई प्रयोग कर रहा है। जिसका ताजा उदाहरण जेल बेकरी है। रक्षाबंधन पर भी जेल में विशेष इंतजाम थे। कैदियों और बंदियों के लिए पकवान बनवाए गए थे। इसके साथ जेल में पहली बार मिठाई भी बनवाई गई। ये उन बहनों के लिए थी, जो अपने भाइयों के लिए मिठाई लाना भूल गईं थी। जेल में बने गुलाब जामुन, लड्डू, छेना और बर्फी बनवाए गए थे। इनकी बिक्री की गई और वह बाजार भाव से कम में। दरअसल, बाहर से केवल खुली मिठाई लाने की अनुमति दी गई थी। ऐसे सील पैक मिठाई को अंदर नहीं ले जाने दिया गया।
