शहर से गांव तक पानी-पानी: प्रयागराज में गंगा-यमुना का कहर, लाखों लोग प्रभावित

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प्रशासन ने संभाला मोर्चा, राहत शिविरों की व्यवस्था तेज, श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार, संगम में डुबकी जारी

दो दर्जन मोहल्ले और 200 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में, पांच लाख से अधिक आबादी प्रभावित

प्रयागराज, अमृत विचार : गंगा और यमुना नदियों में बढ़ते जलस्तर ने प्रयागराज शहर व ग्रामीण अंचलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। दोनों नदियां अपने पूरे वेग पर बह रही हैं, जिससे जिले के लगभग 200 गांव और शहर के कई मोहल्ले जलमग्न हो चुके हैं। करीब पांच लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है, वहीं श्रद्धालु संगम तट पर डटे हुए हैं।

जलस्तर खतरे के करीब : फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.00 मीटर, छतनाग में 83.65 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 84.10 मीटर दर्ज किया गया। प्रयागराज में खतरे का निशान 84.734 मीटर है। फिलहाल नदियां इससे कुछ नीचे हैं लेकिन बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है।

बड़े हनुमान मंदिर जलमग्न, घाट डूबे : संगम क्षेत्र में तीसरी बार बड़ा हनुमान मंदिर जलमग्न हो गया है। मंदिर का कॉरिडोर पानी में डूब गया, जिसके बाद पूजन-अर्चन कर मंदिर का कपाट बंद कर दिया गया। संगम के सभी प्रमुख घाटों पर बाढ़ का पानी भर गया है।

प्रयागराज पानी

इन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुसा : सलोरी, छोटा बघाड़ा, राजापुर, नेवादा, नया पुरवा, गंगानगर, रसूलाबाद, तेलियरगंज और बेली कछार जैसे इलाके जलमग्न हो गए हैं। झूंसी का बदरा सुनौटी गांव शहर से कट गया है। बाढ़ के बावजूद देशभर से आए श्रद्धालु संगम तट पर डटे हुए हैं। सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं, जहां पहले वाहन चलते थे, अब नावें चल रही हैं। श्रद्धालु इन्हीं नावों के सहारे संगम पहुंचकर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।

प्रशासनिक तैयारी और निरीक्षण : बाढ़ की स्थिति को देखते हुए डीएम मनीष कुमार वर्मा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। छोटा बघाड़ा व अन्य क्षेत्रों में राहत शिविर बनाए गए हैं। एनी बेसेन्ट स्कूल, रंगपुरा में बनाए गए शिविर में स्वच्छ जल, भोजन, शौचालय, विद्युत आदि की व्यवस्था की गई है। डीएम ने सभी विभागों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने नाविकों को लाइफ जैकेट के बिना श्रद्धालुओं को गहरे पानी में ले जाने से मना किया है। तेज बहाव में नाव संचालन पूरी तरह बंद करने का निर्देश है।

सोरांव में हालात चिंताजनक : सोरांव तहसील क्षेत्र के फाफामऊ नगर सीमा के निचले हिस्से में 21 मकानों के भूतल डूब चुके हैं। 130 से अधिक लोग प्रभावित हैं। एसडीएम हीरालाल सैनी ने बताया कि प्रभावितों को भोजन और आवश्यक सामग्री वितरित की जा रही है। सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम से हर घंटे दोनों नदियों के जलस्तर की निगरानी की जा रही है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जल पुलिस को संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर दिया गया है।

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