मालवीय नगर अग्निकांड में राजस्थान का अग्रवाल परिवार तबाह : बीमार पिता से मिलने पहुंचे 6 सदस्य, पोती-बहू समेत 8 की मौत
पीड़ित परिवार के सदस्य 80 वर्षीय राधेश्याम अग्रवार को अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में उपचार किया जा रहा है। उनके अस्पताल में भर्ती होने के दौरान अलग-अलग शहरों से उनसे मिलने आये परिवार के सदस्य इस होटल में रुके थे।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में लगी भीषण आग में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की जान चली गई। अपने एक बीमार रिश्तेदार की देखरेख के लिए गुरुग्राम से दिल्ली आए अग्रवाल परिवार के ये सदस्य 'होटल फ्लोरिश स्टे गेस्ट हाउस' में ठहरे हुए थे। यह होटल मैक्स अस्पताल के पास स्थित था।
दरअसल, पीड़ित परिवार के सदस्य 80 वर्षीय राधेश्याम अग्रवार को अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में उपचार किया जा रहा है। उनके अस्पताल में भर्ती होने के दौरान अलग-अलग शहरों से उनसे मिलने आये परिवार के सदस्य इस होटल में रुके थे। मृत लोगों में श्री राधेश्याम के बेटे विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तर्जनी, मां प्रेमलता और उनकी दो बेटियां जीविका और वार्या शामिल थीं।
इनके अलावा, विवेक के मामा अशोक गोयल समेत परिवार के कई अन्य रिश्तेदार भी इस हादसे का शिकार हो गए। रिश्तेदारों के मुताबिक, परिवार ने इस होटल को सिर्फ इसलिए चुना था क्योंकि यह अस्पताल के बिल्कुल पास था, जिससे ज़रूरत पड़ने पर वे तुरंत आईसीयू तक पहुँच सकें। उन्हें उम्मीद थी कि राधेश्याम जल्द ही ठीक होकर घर लौट आएंगे लेकिन उससे पहले ही यह बड़ा हादसा हो गया।
अंतिम समय में साथ रहने राजस्थान से दिल्ली पहुंचा था परिवार
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, मूल रूप से राजस्थान पृष्ठभूमि का यह अग्रवाल परिवार देश के अलग-अलग शहरों में बसा हुआ था। परिवार के 75 वर्षीय मुखिया राधेश्याम फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (लंग इन्फेक्शन) के चलते दिल्ली के मैक्स अस्पताल में बेहद नाजुक स्थिति में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने जब परिवार को संकेत दिया कि राधेश्याम की हालत चिंताजनक है, तो राजस्थान, बेंगलुरु और गुरुग्राम से उनके बेटे, बहुएं और पोतियां आखिरी समय में उनके पास रहने के लिए दिल्ली खिंचे चले आए।
अस्पताल के नजदीक रहने की चाहत बनी काल
बुजुर्ग राधेश्याम की देखभाल और अस्पताल के नजदीक रहने के लिए परिवार ने पास ही स्थित 'फ्लरिश स्टे होटल' में कुछ कमरे बुक किए थे। परिवार का यह फैसला जो उन्हें इस संकट की घड़ी में एक-दूसरे के करीब लाने के लिए था, वही उनके लिए काल बन गया। बुधवार सुबह जब होटल के ग्राउंड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट से आग भड़की, तो ऊपरी मंजिलों पर मौजूद इस परिवार को संकरे रास्तों के कारण बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
एक साथ खत्म हो गईं तीन पीढ़ियां
इस भयावह हादसे में राजस्थान के इस परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ खत्म हो गईं। जान गंवाने वाले 8 सदस्यों में राधेश्याम की 70 वर्षीय पत्नी प्रेमलता, उनका 47 वर्षीय बेटा विवेक, 42 वर्षीय बहू तर्जनी और 16 वर्षीय पोती वार्या (पर्ल) शामिल हैं। वहीं, उनकी बड़ी पोती 20 वर्षीय जीविका (एंजेल), जो दादा को देखने के लिए बेंगलुरु से आई थी, वह भी इस हादसे का शिकार हो गई। इसके अलावा राजस्थान और अन्य जगहों से आए परिवार के 3 और रिश्तेदारों की भी दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई।
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वेंटिलेटर पर लेटे पिता से छुपाया गया सच
मैक्स अस्पताल के बाहर मौजूद राजस्थान से पहुंचे अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनों को खोने के गम के बीच परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बुजुर्ग राधेश्याम को संभालना है। डॉक्टरों की सख्त सलाह पर राधेश्याम से इस भयानक सच को पूरी तरह छुपाकर रखा गया है। वे खुद वेंटिलेटर पर हैं और परिजनों को डर है कि यदि उन्हें यह पता चला कि उनकी पत्नी, बेटे और पोतियों की मौत हो चुकी है, तो वे इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। इस दर्दनाक हादसे के बाद राजस्थान में रहने वाले अग्रवाल परिवार के परिचितों और रिश्तेदारों में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
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