लखनऊ की आबादी 60 लाख के पार पहुंचने का अनुमान, शहरीकरण और पलायन को माना जा रहा मुख्य कारण
शहरीकरण और पलायन से बढ़ी जनसंख्या, ग्रामीण क्षेत्रों में भी 17 लाख से अधिक लोगों की गणना
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की जनसंख्या में पिछले डेढ़ दशक के दौरान भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जनगणना से जुड़े प्रारंभिक आंकड़ों के हवाले से सामने आया है कि शहर और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर अब पूरे जिले की अनुमानित आबादी 60 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में हुई पिछली जनगणना के दौरान लखनऊ की कुल आबादी करीब 28 लाख दर्ज की गई थी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए बनाए गए 9,101 ब्लॉक
जिला प्रशासन द्वारा जनगणना कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कुल 9,101 ब्लॉक तैयार किए गए थे। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2,842 ब्लॉक निर्धारित किए गए थे, जहाँ एक महीने तक चले हाउसहोल्ड सर्वे के बाद कुल 17,64,796 (17.64 लाख से अधिक) लोगों की गणना की जा चुकी है।
रोजगार और शिक्षा के कारण बढ़ा पलायन
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, बेहतर सुविधाओं, रोजगार और उच्च शिक्षा की तलाश में ग्रामीण व अन्य क्षेत्रों से होने वाले पलायन के कारण लखनऊ की शहरी आबादी में सबसे तेज इजाफा देखने को मिला है। शहर की अनुमानित आबादी अब 44.31 लाख आंकी गई है।
शहरी आबादी 44.31 लाख अनुमानित
शहरी क्षेत्र के लिए कुल 6,331 ब्लॉक बनाए गए थे, जिनमें से अब तक 76.73 प्रतिशत ब्लॉकों में गणना का काम पूरा किया जा चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक पूरे हो चुके 4,090 ब्लॉकों में 34,00,433 लोगों की गिनती दर्ज की जा चुकी है। जिला प्रशासन का मानना है कि जैसे ही शेष ब्लॉकों के आंकड़े भी सामने आएंगे, अंतिम रिपोर्ट में लखनऊ की कुल आबादी में और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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