तूफान के पहले की खामोशी, राम मंदिर व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन होने के आसार
राजेंद्र कुमार पांडेय/ अयोध्या, अमृत विचार। समारोह के बावजूद श्रीराम मंदिर में तूफान के पहले की खामोशी है। एसआईटी ने अपने सप्ताह भर की जांच रिपोर्ट सौंप दी है। अब बोतल से जिन्न बाहर आने का इंतजार है। राम मंदिर की व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन होने के आसार हैं। श्री राम मंदिर परिसर के शेषावतार मंदिर में मंगलवार को ध्वज आरोहण कार्यक्रम था, लेकिन इस बार के न तो पहले की तरह भीड़ भाड़ थी और न ही व्यवस्थाएं। ऐसे लगा कि जैसे जल्दबाजी में सब कुछ किया जा रहा है।
हर चेहरे पर अजीब सी शिकन थी, उल्लास का अभाव है। हालांकि कुछ असर तो मुख्य अतिथियों का कार्यक्रम रद्द होने का भी रहा लेकिन राम मंदिर में जैसे वहां के कारिदों को सांप सूंघ गया हो। अमूमन कार्यक्रमों में सक्रिय रहने वाले कई चेहरे कार्यक्रम की सीन से बाहर थे। कई की पहले ही छुट्टी कर दी गई तो कई चुपचाप छुट्टी पर बताए गए।
एसआईटी के लखनऊ में रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद माहौल और तनावपूर्ण देखा गया है। श्रद्धालुओं की बात छोड़ दी जाए तो मंदिर संचालन में लगे पदाधिकारी और कारिंदे एक-दूसरे के चेहरे को निहार रहे है। जैसे उनके माथे की सिलवटों को पढ़ने की कोशिश कर रहे हों। ट्रस्ट के तीन पदाधिकारी महासचिव चंपत राय. ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के साथ गोपाल राव मौजूद तो थे, लेकिन सक्रियता नहीं रही। कार्यक्रम का संचालन करने वाले कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के साथ ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास सहित अन्य लोग सक्रिय रहे।
एसआईटी के बोतल का जिन्न अभी बाहर नहीं आया है लेकिन चढ़ावा चोरी प्रकरण में छोटे से बड़े तक इसके दायरे में माने जा रहे हैं। असलियत तो कार्रवाई शुरू होने के बाद एक-एक करके सामने आनी शुरू होगी लेकिन कार्रवाई से पहले ही दायरे में आने वालों को इसका अंदाजा लग गया है। सूत्रों का कहना है कि इनके चेहरे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वह कार्रवाई के दायरे में हैं। हालांकि वह अपने कार्य व्यवहार से इसे दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
एसआईटी की 20 पन्ने की रिपोर्ट में जिन्न ही जिन्न हैं। अंदरखाने में यह चर्चा है कि एसआईटी की रिपोर्ट में आमूल चूल परिवर्तन का संकेत निहित है। इसके तहत ट्रस्ट के गठन से लेकर इसकी कार्यप्रणाली में परिवर्तन संभावित है। स्वतंत्र ट्रस्ट के साथ दक्षिण के मंदिरों की तर्ज पर सरकारी दखल भी संभव हो सकती है। हालांकि अभी इसकी औपचारिक जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन संघ, भाजपा और विहिप में इसको लेकर मंथन अंतिम दौर में हैं। तस्वीर जल्द साफ होने की बात कही जा रही है।
