बरेली: गंगाशील समूह के संस्थापक डॉ. एन.के. गुप्ता का निधन, चिकित्सा जगत में शोक की लहर
बरेली, अमृत विचार। गंगाशील समूह के संस्थापक, वरिष्ठ चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. नवल किशोर गुप्ता (डॉ. एन.के. गुप्ता) का निधन हो गया है। उनका दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान गुरुवार सुबह डॉ. एन.के. गुप्ता ने आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से चिकित्सा जगत, सामाजिक क्षेत्र और उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।
मॉडल टाउन श्मशान घाट पर होगा अंतिम संस्कार
डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी के अनुसार गुरुवार शाम 4 बजे उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से गंगाशील डीडी पुरम बरेली पहुंचेगा। यहां अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को रखा जायेगा। इसके बाद शाम 6:30 बजे बरेली के मॉडल टाउन श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।
चिकित्सा सेवा को समर्पित जीवन
डॉ. एन.के. गुप्ता ने बरेली और आसपास के क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साल 1965 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी) से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने बरेली में निजी चिकित्सक के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। मरीजों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और समर्पण ने उन्हें जल्द ही एक भरोसेमंद चिकित्सक के रूप में पहचान दिलाई।
शिक्षा और स्वास्थ्य में योगदान
स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से डॉ. गुप्ता ने वर्ष 1979 में आलमगिरिगंज में शील मैटरनिटी एंड नर्सिंग होम की स्थापना की थी। साल 1989 में उन्होंने शील अस्पताल की स्थापना की, जो बाद में गंगाशील समूह का हिस्सा बना। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड क्षेत्र का पहला मल्टी-सुपर स्पेशलिटी अस्पताल माना जाता था।
चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ डॉ. गुप्ता ने स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके मार्गदर्शन में गंगाशील स्कूल ऑफ नर्सिंग, गंगाशील ब्लड बैंक और ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की गई। इन संस्थानों ने न केवल मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराईं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई।
छोड़ गए प्रेरणादायी विरासत
डॉ. एन.के. गुप्ता का जीवन सेवा, समर्पण और नवाचार का उदाहरण रहा। उन्होंने जिस दृष्टि के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया, उसका लाभ आज भी लाखों लोग उठा रहे हैं। उनके निधन से चिकित्सा क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनके कार्य और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
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