टीम इंडिया में आते ही कहर बरपाते नजर आए गुरनूर बराड़, IPL में नहीं मिला मौका तो ड्रेसिंग रूम बना दी पाठशाला
लखनऊ: "मेरे लिए परिणाम नहीं, बल्कि उसके लिए की गई तैयारी मायने रखती है।" यह कहना है भारतीय क्रिकेट के नए उभरते सितारे और तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ का। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले में 3 विकेट चटकाकर सुर्खियां बटोरने वाले गुरनूर ने अपनी गेंदबाजी से हर किसी को अपना मुरीद बना लिया है। 6 फीट 5 इंच लंबे पंजाब के इस युवा पेसर की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उनकी 140 किमी/घंटे की रफ्तार नहीं, बल्कि खेल को लेकर उनकी परिपक्व सोच और खुद पर अटूट विश्वास है।
इकाना में अफगान बल्लेबाजों को घुटनों पर लाया
अफगानिस्तान के खिलाफ लगातार दूसरे मैच में गुरनूर बराड़ ने अपनी धारदार गेंदबाजी का लोहा मनवाया। इकाना की पिच पर उन्होंने अपनी लंबाई का पूरा फायदा उठाया और तीखे बाउंसर व सटीक यॉर्कर फेंककर विपक्षी बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुरनूर ने अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि मैं लोगों की उम्मीदों या स्पीड गन के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपनी काबिलियत पर भरोसा रखते हुए सटीक हार्ड लेंथ गेंदें फेंकने पर होता है। नतीजा क्या होगा, इसकी परवाह मैं नहीं करता। मैं रोजाना अपनी उसी तैयारी को दोहराना चाहता हूँ। मुझे पता है कि मुझमें इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है।"
IPL में नहीं मिला मौका, तो ड्रेसिंग रूम को बनाया पाठशाला
गुरनूर बराड़ को साल 2025 की मेगा नीलामी में गुजरात टाइटंस (GT) ने ₹1.30 करोड़ की बड़ी कीमत पर खरीदा था। दिलचस्प बात यह है कि इस टीम के कप्तान उनके गृह राज्य (पंजाब) के शुभमन गिल हैं। दो सीजन तक गुजरात टाइटंस के साथ रहने के बावजूद गुरनूर को एक भी मैच खेलने का मौका (प्लेइंग इलेवन में) नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे सकारात्मक रूप में लिया।
दिग्गजों ने दी बड़ी सीख
बेंच पर बैठे रहने के दौरान गुरनूर निराश नहीं हुए, बल्कि उन्होंने कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, इशांत शर्मा और हेड कोच आशीष नेहरा की गेंदबाजी व रणनीतियों को करीब से देखा और सीखा।
गुरनूर ने मुस्कुराते हुए कहा, "हर खिलाड़ी मैदान पर उतरना चाहता है, मैं भी अपने मौके की राह देख रहा था। लेकिन उस दौरान मैं दूसरों की खूबियों और गलतियों से सीख रहा था। आईपीएल में भले मौका न मिला हो, लेकिन भगवान की कृपा से मुझे सीधे भारतीय टीम (ब्लू जर्सी) में मौका मिल गया।"
चोट को मात देकर ऐसे तय किया 'टीम इंडिया' का सफर
गुरनूर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण वह पूरा 2023-24 सीजन नहीं खेल पाए थे, लेकिन उन्होंने जो वापसी की, वह किसी मिसाल से कम नहीं है:
चोट से उबरने के बाद उन्होंने 2024 के शेरे पंजाब टी20 कप में सबसे ज्यादा 22 विकेट झटके। इसके बाद 2024-25 रणजी ट्रॉफी सीजन के 7 मैचों में 26 विकेट लेकर वह पंजाब के सबसे सफल गेंदबाज बने।
बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले उन्हें चेन्नई में टीम इंडिया के नेट गेंदबाज के रूप में शामिल किया गया था। इसके बाद 'इंडिया ए' टीम में चुनकर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ दो मैचों में 8 विकेट चटकाए।
क्या है गुरनूर का सक्सेस फॉर्मूला?
अपनी गेंदबाजी के मुख्य हथियारों के बारे में बात करते हुए गुरनूर ने बताया कि "नई गेंद के साथ मेरी पहली प्राथमिकता आउटस्विंग कराना होती है, जो हर बल्लेबाज के लिए मुश्किल पैदा करती है। अगर स्विंग न मिले, तो मैं अपनी लेंथ को थोड़ा पीछे खींच लेता हूं। मेरा मानना है कि हर तेज गेंदबाज के पास बेहतरीन यॉर्कर होनी ही चाहिए। मैं डेथ ओवरों की गेंदबाजी पर विशेष काम कर रहा हूँ, क्योंकि अंतिम ओवरों में बड़े हिटर्स के खिलाफ यॉर्कर ही सबसे बड़ा हथियार साबित होती है।"
