राम मंदिर चढ़ावा विवाद में कूदी विहिप, आलोक कुमार ने कहा- 4 महीने में दोषियों को मिले सजा

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Published By Anjali Singh
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नयी दिल्ली/अयोध्या: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में राम मंदिर को मिले चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। विहिप ने इस मामले में तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।


'4 महीने में पूरी हो जांच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई'

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा: "हमारी मांग है कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में तत्काल FIR दर्ज की जाए, जांच में तेजी लाई जाए और फास्ट-ट्रैक अदालत में रोजाना (डेली बेसिस पर) सुनवाई हो ताकि आरोपियों को बिना किसी देरी के न्याय के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जा सके।"

 

SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट

विहिप की यह मांग ऐसे समय में आई है जब दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। यह रिपोर्ट लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत द्वारा गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई। अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी की जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों व सबूतों को संकलित किया जा रहा है। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि टीम अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट सौंपने का प्रयास कर रही है।


मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर हुआ था SIT का गठन

गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को दान में कथित हेराफेरी और अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए इस विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को सोशल मीडिया और मीडिया खबरों का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि राम मंदिर को चंदे में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने इस गंभीर मामले में अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील भी की थी।

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