विस्फोट से पहले अलर्ट करता है कंप्रेसर, जानिए असली वजह और जानलेवा दुर्घटना से बचने का तरीका
-सस्ती हाइड्रोकार्बन से फट रहे हैं एसी और फ्रीज के कंप्रेसर -लखनऊ शहर में आगजनी की हुई है लगातार घटनाएं -अचानक नहीं फटता कंप्रेसर उसके पहले देता है संकेत
लखनऊ, अमृत विचार: सामान्यत: लोग तकनीकी खराबी होने पर ही एसी की सर्विस कराते हैं, केवल गर्मी शुरू होने पर एक बार साफ-सफाई करा दी जाती है, जबकि प्रत्येक वर्ष कम से कम एक सर्विस और गर्मी में बीच-बीच में साफ सफाई जरूरी है। दरअसल इस्तेमाल होने पर एसी के आउटडोर में धूल जमा हो जाती है। गर्मी बढ़ने पर इस धूल के कारण एसी ओवरहीट होने पर कंप्रेसर में विस्फोट या आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। एसी और रेफ्रिजरेटर के कंप्रेसर सस्ते गुणवत्ता का हाइड्रोकार्बन भी जल्दी गर्म होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की गर्म और धूलभरी जलवायु के कारण अन्य देशों की तुलना में एसी पर दबाव अधिक रहता है। बाहरी तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर कंप्रेसर पर कमरे की गर्मी बाहर निकालने के लिए लोड बढ़ जाता है। उस स्थिति में अगर कंडेनसर कॉयल पर धूल के अलावा गैस का असामान्य दबाव के अलावा वोल्टेज बार-बार ऊपर-नीचे हो या वायरिंग खराब होने की स्थिति में ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है। यही स्थिति अक्सर कंप्रेसर में आग लगने या विस्फोट का कारण बनती है।
इंटवर्टर तकनीक का एसी उपयुक्त्
इन्वर्टर तकनीक का एसी उच्च तापमान पर भी काम करने की क्षमता, मजबूत कंप्रेसर, बेहतर कूलिंग कॉयल और पर्याप्त ऊर्जा दक्षता (उच्च स्टार रेटिंग) वाला होता है। ये अधिक सुरक्षित माना जाता है।
एसी लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान
एसी प्रशिक्षित तकनीशियन से ही लगवाएं। बिजली की वायरिंग एसी के लोड के अनुसार होनी चाहिए तथा अलग एमसीबी और अर्थिंग की व्यवस्था हो। आउटडोर यूनिट ऐसी जगह लगाई जाए जहां उसके चारों ओर पर्याप्त हवा का प्रवाह हो। उसे बंद बॉक्स, संकरे शाफ्ट या सीधे तेज धूप में रखने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। गैस पाइप, ड्रेनेज और विद्युत कनेक्शन की समय-समय पर जांच भी आवश्यक है।
यह भी रखे ध्यान
एसी के फिल्टर को प्रत्येक 15–30 दिन में साफ कराना चाहिए
वर्ष में कम से कम एक बार पूरी सर्विस कराना आवश्यक
लंबे समय तक 24–26 डिग्री पर ही चलाना चाहिए
एक टन का एसी वातावरण को कितना करता है गर्म
तकनीकी रूप से एक टन क्षमता का एसी कमरे से लगभग 3.5 किलोवाट (करीब 12,000 बीटीयू प्रति घंटा) गर्मी बाहर निकालता है। लेकिन यह केवल कमरे की गर्मी नहीं छोड़ता, बल्कि स्वयं जितनी बिजली खर्च करता है, वह ऊर्जा भी अंततः गर्मी के रूप में बाहर निकलती है। यदि एक टन का इन्वर्टर एसी औसतन 1 किलोवाट बिजली की खपत कर रहा हो, तो बाहर निकलने वाली कुल गर्मी लगभग 4.5 किलोवाट तक हो सकती है। एसी कमरे को ठंडा जरूर करता है, लेकिन बाहर के वातावरण में उससे अधिक गर्मी छोड़ता है। लखनऊ में अनुमान के अनुसार करीब 10 लाख एयर कंडिनशनर 35 लाख किलोवाट गर्मी पैदा कर रहे हैं।
रेफ्रिजरेटर भी इसी सिद्धांत पर करता है काम
रेफ्रिजरेटर भी कमरे के अंदर से गर्मी निकालकर पीछे लगी कंडेनसर कॉयल के माध्यम से बाहर छोड़ता है। इसलिए फ्रिज के पीछे की ग्रिल अक्सर गर्म महसूस होती है। यदि फ्रिज को दीवार से बिल्कुल सटाकर रखा जाए या उसके पीछे हवा के निकलने की जगह न हो, तो कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और बिजली की खपत भी बढ़ जाती है।
55 डिग्री तापमान में काम करते है घरेलू एयरकंडीशनर
भारत में घरेलू एयर कंडीशनर (स्प्लिट या विंडो) में लगाए जाने वाले कंप्रेसरों की "अधिकतम सहन क्षमता" आमतौर पर बाहरी तापमान के आधार पर बताई जाती है। अधिकांश सामान्य एसी लगभग 52 डिग्री सेल्सियस से से 55 डिग्री सेल्सियस तक के बाहरी तापमान पर काम करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। कई नए इन्वर्टर एसी निर्माता 55 डिग्री सेल्सियस तक संचालन का दावा करते हैं।
इसे भी रखे याद
कंप्रेसर अचानक से नहीं फटता बल्कि फटने से पहले वह संकेत देता है जैसे ज़ोरदार खड़खड़ाहट की आवाज, हिसिंग की आवाज़, प्लास्टिक जलने जैसी गंध, एसी चालू होते ही एमसीबी का ट्रिप होना, कॉपर पाइप या इनडोर यूनिट पर बर्फ जमना, कूलिंग कम होना और एसी का बार-बार ट्रिप होना।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
एसी यदि बिना रुके चलता है, तो उसका कंप्रेसर लगातार रेफ्रिजरेंट गैस को सर्कुलेट करता रहता है। जब यह बिना रुके चलता है, तो उसके अंदर का दबाव और तापमान बहुत बढ़ जाता है। जब कंप्रेसर खराब होता है, तो अचानक धमाके जैसी आवाज़ आ सकती है। रेफ्रिजरेंट गैस के रिसाव का भी खतरा रहता है। आमतौर पर आजकल इस्तेमाल होने वाली गैसें सुरक्षित होती हैं, लेकिन सस्ती हाइड्रोकार्बन गैसों में आग लगने का जोखिम हो सकता है। यदि गैस का रिसाव खराब वायरिंग से निकलने वाली चिंगारी के संपर्क में आ जाए, तो आग लग सकती है। - प्रो. नरेन्द्र कुमार पाण्डेय, भौतिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
विस्फोट के पीछे कई वैज्ञानिक और तकनीकी कारण एक साथ कार्य करते हैं। एयर कंडीशनर ऊष्मागतिकी के सिद्धांत पर आधारित एक ऊष्मा स्थानांतरण प्रणाली है। इसका कार्य कमरे की गर्मी को बाहर निकालना होता है। इस प्रक्रिया में कंप्रेसर रेफ्रिजरेंट गैस को उच्च दाब पर संपीडित करता है और कंडेंसर उस ऊष्मा को वातावरण में छोड़ता है। जब बाहरी तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब कंडेंसर के लिए वातावरण में ऊष्मा का निष्कासन कठिन हो जाता है। परिणामस्वरूप कंप्रेसर को अधिक समय तक और अधिक शक्ति के साथ कार्य करना पड़ता है। इससे विद्युत धारा, तापमान तथा ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है। यहीं से जोखिम की शुरुआत होती है। यदि कंडेंसर की कॉइल (Coil) धूल और गंदगी से ढकी हो, बाहरी यूनिट के आसपास वायु संचार बाधित हो, या कूलिंग फैन ठीक से कार्य न कर रहा हो, तो मशीन के भीतर उत्पन्न अतिरिक्त ऊष्मा बाहर नहीं निकल पाती। लगातार बढ़ता तापमान कंप्रेसर, मोटर की इंसुलेशन परत तथा इलेक्ट्रिक सर्किट को प्रभावित करता है। समय के साथ यही स्थिति आग लगने का कारण बन सकती है। -डॉ. आरके शुक्ला, भौतिक विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
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